मनरेगा में ‘कागजी मजदूरों’ का साम्राज्य, खखड़ा गांव में 143 नाम, मौके पर गिने-चुने लोग, बड़ा घोटाला उजागर
शहाबगंज विकासखंड के खखड़ा गांव में मनरेगा योजना खुलेआम लूट का जरिया बन चुकी है। यहां कागजों में 143 मजदूरों की फौज खड़ी कर दी गई है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है, मौके पर मजदूरों की संख्या उंगलियों पर गिनने लायक बताई जा रही है।

मनरेगा में ‘कागजी मजदूरों’ का साम्राज्य, खखड़ा गांव में 143 नाम, मौके पर गिने-चुने लोग, बड़ा घोटाला उजागर
चंदौली। शहाबगंज विकासखंड के खखड़ा गांव में मनरेगा योजना खुलेआम लूट का जरिया बन चुकी है। यहां कागजों में 143 मजदूरों की फौज खड़ी कर दी गई है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है, मौके पर मजदूरों की संख्या उंगलियों पर गिनने लायक बताई जा रही है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि महज 3 कार्यों के लिए 15 मस्टररोल जारी किए गए हैं। इतने बड़े पैमाने पर मस्टररोल निकालना साफ संकेत देता है कि खेल योजनाबद्ध तरीके से खेला जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिन लोगों ने कभी फावड़ा तक नहीं उठाया, उनके नाम पर हाजिरी भर दी जा रही है और फर्जी तस्वीरें अपलोड कर सरकारी धन का सीधा बंदरबांट किया जा रहा है।
गांव में चर्चा है कि यह गड़बड़ी किसी एक व्यक्ति का खेल नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की मिलीभगत से चल रहा संगठित भ्रष्टाचार है। जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी आंख मूंदे बैठे हैं, जिससे भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद हैं।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर मनरेगा की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर यही हाल रहा तो गरीबों के हक की मजदूरी कागजों में ही दम तोड़ती रहेगी।
खंड विकास अधिकारी दिनेश सिंह ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह जांच भी सिर्फ फाइलों में सिमटकर रह जाएगी या फिर वाकई किसी बड़े चेहरे पर गाज गिरेगी।
फिलहाल खखड़ा गांव में मनरेगा रोजगार योजना नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार योजना बनती नजर आ रही है।




