शहाबगंज: हरौड़ा में मनरेगा पर ‘कागजी मजदूरों’ का खेल! दो कार्यों पर 12 मस्टररोल, 120 श्रमिकों की हाजिरी पर उठे सवाल, CDO साहब करेंगे कार्रवाई
शहाबगंज विकासखंड के हरौड़ा गांव में मनरेगा कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप सामने आए हैं।

हरौड़ा में मनरेगा पर ‘कागजी मजदूरों’ का खेल! दो कार्यों पर 12 मस्टररोल, 120 श्रमिकों की हाजिरी पर उठे सवाल
चकिया/चंदौली। शहाबगंज विकासखंड के हरौड़ा गांव में मनरेगा कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, मौके पर मजदूरों की संख्या नगण्य दिखाई देती है, जबकि सरकारी अभिलेखों में 120 मजदूरों के कार्यरत होने का उल्लेख किया गया है। इससे मनरेगा कार्यों की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
आरोप है कि गांव में चल रहे मात्र दो कार्यों के लिए 12 मस्टररोल जारी किए गए हैं। इतना ही नहीं, जिन लोगों का वास्तविक रूप से कार्यस्थल से कोई संबंध नहीं है, उनकी उपस्थिति भी दर्ज कर फोटो अपलोड किए जाने की बात कही जा रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मनरेगा के नाम पर सरकारी धन की बंदरबांट का बड़ा मामला साबित हो सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि शासन की मंशा जरूरतमंदों को रोजगार उपलब्ध कराने की है, लेकिन हरौड़ा में योजना का लाभ मजदूरों के बजाय कागजों पर दिखाए जा रहे फर्जी आंकड़ों को मिल रहा है। इससे वास्तविक श्रमिकों के अधिकारों पर भी कुठाराघात हो रहा है।
मामले में जब ग्राम प्रधान से पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कहा, “हम भी पत्रकार हैं। आप खबर छापेंगे तो हम भी छापेंगे।” हालांकि, आरोपों के संबंध में उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
वहीं, इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी से बात किए जाने पर उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और यदि अनियमितता पाई गई तो दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
अब सवाल यह है कि जब मौके पर मजदूर नहीं दिख रहे हैं तो आखिर सरकारी रिकॉर्ड में 120 मजदूरों की उपस्थिति कैसे दर्ज हो रही है? क्या मनरेगा में फर्जी हाजिरी के सहारे सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है, या फिर जांच के बाद कोई और सच्चाई सामने आएगी? यह आने वाली जांच में स्पष्ट होगा।




