शहाबगंज: मनरेगा में ‘कागजी मजदूरों’ का खेल! अरारी में 190 श्रमिकों की हाजिरी, जमीन पर नहीं दिख रहा काम
शहाबगंज विकासखंड की अरारी ग्राम पंचायत में मनरेगा के तहत कथित तौर पर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का मामला सामने आ रहा है।

मनरेगा में ‘कागजी मजदूरों’ का खेल! अरारी में 190 श्रमिकों की हाजिरी, जमीन पर नहीं दिख रहा काम
चंदौली। शहाबगंज विकासखंड की अरारी ग्राम पंचायत में मनरेगा के तहत कथित तौर पर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का मामला सामने आ रहा है। आरोप है कि यहां लगभग 190 मजदूर केवल सरकारी अभिलेखों में कार्यरत दिखाए जा रहे हैं, जबकि मौके पर वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल अलग नजर आती है। यदि आरोप सही हैं तो यह न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला है, बल्कि गरीब मजदूरों के अधिकारों पर भी सीधा प्रहार है।
मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को रोजगार उपलब्ध कराना और गांवों में टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण कराना है। लेकिन अरारी ग्राम पंचायत में जिस तरह कागजों पर मजदूरों की भारी संख्या दर्ज होने की बात सामने आ रही है, उसने योजना की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिन कार्यों पर बड़ी संख्या में मजदूरों की उपस्थिति दर्ज है, वहां वास्तविकता में उतनी श्रमशक्ति दिखाई नहीं देती।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि कार्यस्थल पर मजदूर मौजूद नहीं हैं तो उनकी उपस्थिति किस आधार पर दर्ज की जा रही है? क्या मस्टररोल और भुगतान प्रक्रिया की नियमित जांच हो रही है? यदि नहीं, तो जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।
गौरतलब है कि मनरेगा में फर्जी हाजिरी, कागजी मजदूर और बिना कार्य कराए भुगतान जैसे आरोप समय-समय पर सामने आते रहे हैं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई के अभाव में ऐसे मामलों पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पा रहा है। अरारी का मामला भी प्रशासनिक निगरानी की कमजोरियों को उजागर करता है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, कार्यस्थलों का भौतिक सत्यापन कराने तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सरकारी धन की खुली लूट का मामला साबित हो सकता है।
सवाल जो जवाब मांग रहे हैं
- क्या 190 मजदूर वास्तव में कार्यस्थल पर मौजूद थे?
- मस्टररोल में दर्ज हाजिरी का सत्यापन किसने किया?
- बिना भौतिक जांच के भुगतान कैसे स्वीकृत हुआ?
- आखिर मनरेगा में कागजी मजदूरों के खेल पर लगाम कब लगेगी?
जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक मनरेगा में भ्रष्टाचार के ऐसे आरोप ग्रामीण विकास की मंशा को लगातार चोट पहुंचाते रहेंगे।




