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शहाबगंज: हरौड़ा में मनरेगा पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, 120 कागजी मजदूरों के सहारे सरकारी धन की बंदरबांट का दावा, कार्रवाई की मांग

शहाबगंज विकासखंड के हरौड़ा गांव में मनरेगा योजना को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां सुनियोजित तरीके से भ्रष्टाचार को अंजाम दिया जा रहा है।

हरौड़ा में मनरेगा पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, 120 कागजी मजदूरों के सहारे सरकारी धन की बंदरबांट का दावा

चंदौली। शहाबगंज विकासखंड के हरौड़ा गांव में मनरेगा योजना को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां सुनियोजित तरीके से भ्रष्टाचार को अंजाम दिया जा रहा है और सरकारी अभिलेखों में 120 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज कराकर लाखों रुपये के भुगतान की तैयारी की जा रही है, जबकि धरातल पर कार्य और मजदूरों की वास्तविक संख्या को लेकर गंभीर सवाल खड़े हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि मामले की शिकायत कई बार संबंधित अधिकारियों से की गई, लेकिन आज तक कोई प्रभावी जांच या कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि शिकायतों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों के हौसले और बुलंद होते जा रहे हैं।

गांव में चर्चा का विषय यह भी बना हुआ है कि आखिर शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मौन क्यों हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों की निष्क्रियता संदेह को जन्म दे रही है और ऐसा प्रतीत होता है कि शिकायतों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें दबाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

मनरेगा जैसी योजना का उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को रोजगार उपलब्ध कराना और गांवों में विकास कार्य कराना है, लेकिन यदि कागजों में मजदूरों की फर्जी उपस्थिति दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है तो यह योजना की मूल भावना के साथ खुला खिलवाड़ है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ग्रामीण लगातार शिकायत कर रहे हैं तो प्रशासन मौके पर जाकर सत्यापन क्यों नहीं करा रहा? क्या अधिकारियों को अनियमितताएं दिखाई नहीं दे रहीं या फिर किसी दबाव में कार्रवाई से बचा जा रहा है? इन सवालों के जवाब अब प्रशासन को देने होंगे।

यदि हरौड़ा में लगाए जा रहे आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि गरीब मजदूरों के हक पर सीधा हमला होगा। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

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