शहाबगंज: मुसाखाड़ में मनरेगा पर भ्रष्टाचार का साया, 104 मजदूरों की कागजी फौज से सरकारी धन पर डाका! क्षेत्र पंचायत सदस्य द्वारा किया जा रहा भ्रष्टाचार
शहाबगंज विकासखंड के मुसाखाड़ ग्राम पंचायत में मनरेगा योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। आरोप है कि यहां 104 मजदूर केवल सरकारी अभिलेखों और मस्टररोल में ही काम कर रहे हैं।

मुसाखाड़ में मनरेगा पर भ्रष्टाचार का साया, 104 मजदूरों की कागजी फौज से सरकारी धन पर डाका!
चंदौली। शहाबगंज विकासखंड के मुसाखाड़ ग्राम पंचायत में मनरेगा योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। आरोप है कि यहां 104 मजदूर केवल सरकारी अभिलेखों और मस्टररोल में ही काम कर रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर उनकी मौजूदगी दिखाई नहीं देती। इससे मनरेगा के नाम पर सरकारी धन की बंदरबांट की आशंका गहरा गई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि मनरेगा कार्यों को नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए क्षेत्र पंचायत सदस्य के प्रभाव में संचालित कराया जा रहा है। योजना का उद्देश्य गांव के गरीब और जरूरतमंद मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना है, लेकिन मुसाखाड़ में यह योजना कुछ लोगों के लिए कमाई का साधन बनती दिखाई दे रही है।
बताया जाता है कि मजदूरों की संख्या कागजों में बढ़ाकर हाजिरी दर्ज की जा रही है और सरकारी खजाने से धन निकाला जा रहा है। यदि आरोपों में सच्चाई है तो यह सिर्फ वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि गरीबों के हक पर खुली डकैती है।
हैरानी की बात यह है कि मनरेगा में पारदर्शिता के लिए ऑनलाइन मस्टररोल, जियो टैगिंग और नियमित निरीक्षण जैसी व्यवस्थाएं लागू हैं, फिर भी कथित तौर पर फर्जीवाड़े का खेल जारी है। सवाल उठ रहा है कि जिम्मेदार अधिकारी आखिर आंखें मूंदे क्यों बैठे हैं? क्या भ्रष्टाचार की इस पटकथा में कुछ अधिकारियों की भी भूमिका है, या फिर निगरानी तंत्र पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका है।
ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करता है या फिर मनरेगा के नाम पर सरकारी धन की बंदरबांट का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।




