चकिया: खनन माफियाओं के आगे नतमस्तक सिस्टम! मुजफ्फरपुर पहाड़ी कगरा में दिन-रात चल रहा अवैध मिट्टी खनन, खनन विभाग मौन
सरकार एक ओर अवैध खनन पर सख्ती के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर चकिया कोतवाली क्षेत्र के मुजफ्फरपुर पहाड़ी कगरा के पास खुलेआम मिट्टी का अवैध खनन प्रशासनिक दावों की पोल खोल रहा है।

खनन माफियाओं के आगे नतमस्तक सिस्टम! मुजफ्फरपुर पहाड़ी कगरा में दिन-रात चल रहा अवैध मिट्टी खनन, प्रशासन मौन
चकिया, चंदौली। सरकार एक ओर अवैध खनन पर सख्ती के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर चकिया कोतवाली क्षेत्र के मुजफ्फरपुर पहाड़ी कगरा के पास खुलेआम मिट्टी का अवैध खनन प्रशासनिक दावों की पोल खोल रहा है। बिना किसी वैध अनुमति के दिन-रात जेसीबी मशीनों से धरती का सीना चीरकर मिट्टी निकाली जा रही है और ट्रैक्टर-ट्रालियों के जरिए उसकी ढुलाई की जा रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि खनन माफिया इतने बेखौफ हैं कि उन्हें न कानून का डर है और न ही प्रशासनिक कार्रवाई का भय। रात के अंधेरे से लेकर दिन के उजाले तक जेसीबी मशीनों की गर्जना और ट्रैक्टरों की आवाजाही लगातार जारी है। खनन के निर्धारित मानकों और नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर बिना अनुमति इतने बड़े पैमाने पर खनन कैसे हो रहा है? क्या संबंधित विभागों को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर सब कुछ उनकी आंखों के सामने हो रहा है? क्षेत्र में चल रही इस गतिविधि ने खनन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन से न केवल राजस्व की क्षति हो रही है, बल्कि पर्यावरण और भू-संरचना को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो भविष्य में बड़े भू-धंसाव और अन्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
सवाल यह नहीं कि अवैध खनन हो रहा है, सवाल यह है कि आखिर किसके संरक्षण में हो रहा है? जब दिन-रात जेसीबी और ट्रैक्टर सड़कों पर दौड़ रहे हैं तो खनन विभाग, राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन की नजर वहां तक क्यों नहीं पहुंच रही? यह खामोशी कई सवालों को जन्म दे रही है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस खबर का संज्ञान लेकर कार्रवाई करता है या फिर अवैध खनन का यह खेल यूं ही चलता रहेगा और सरकारी दावे केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगे।




