शहाबगंज: रोहाखी में मनरेगा का ‘कागजी खेल’! 290 मजदूरों की हाजिरी, जमीन पर सवालों का अंबार, मजदूर नकली भुगतान असली, जांच की मांग
शहाबगंज विकासखंड के रोहाखी गांव में मनरेगा के तहत कराए जा रहे कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं।

रोहाखी में मनरेगा का ‘कागजी खेल’! 290 मजदूरों की हाजिरी, जमीन पर सवालों का अंबार
शहाबगंज, चंदौली। शहाबगंज विकासखंड के रोहाखी गांव में मनरेगा के तहत कराए जा रहे कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि यहां सरकारी अभिलेखों में सैकड़ों मजदूरों से काम कराया जा रहा है, जबकि जमीनी स्थिति कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत की ओर से कमलेश के खेत से गंदा नाला तक नाली खुदाई कार्य कराया जाना दर्शाया गया है। मनरेगा पोर्टल और विभागीय रिकॉर्ड में इस कार्य पर 290 मजदूरों के कार्यरत होने का उल्लेख है। आरोप है कि बड़ी संख्या में ऐसे लोगों की भी हाजिरी भरी जा रही है जो कार्यस्थल पर कभी पहुंचे ही नहीं।
ग्रामीणों का कहना है कि जिन लोगों ने मनरेगा में एक दिन भी काम नहीं किया, उनके नाम भी मस्टररोल में दर्ज कर मजदूरी का भुगतान किया जा रहा है। इससे योजना के धन के दुरुपयोग और फर्जी भुगतान की आशंका गहरा गई है। आरोप है कि कागजों में मजदूरों की संख्या बढ़ाकर सरकारी धन निकालने का खेल चल रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन, मस्टररोल की जांच और मजदूरों के खातों में हुए भुगतान का मिलान कराया जाए तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
कागजों में मजदूर, भुगतान असली!
मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना है, लेकिन रोहाखी गांव में लगे आरोपों ने योजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आरोप सही पाए गए तो यह केवल वित्तीय अनियमितता नहीं बल्कि सरकारी योजनाओं में जनता के विश्वास को चोट पहुंचाने वाला मामला होगा।




