खाद के लिए हाहाकार: शिकारगंज समिति पर किसानों की कतार, ब्लैक मार्केटिंग के आरोप से मचा बवाल
40 गांवों के किसान परेशान, दो-दो बोरी यूरिया तक सीमित वितरण; रसूखदारों को पहले खाद देने का आरोप

खाद के लिए हाहाकार: शिकारगंज समिति पर किसानों की कतार, ब्लैक मार्केटिंग के आरोप से मचा बवाल
40 गांवों के किसान परेशान, दो-दो बोरी यूरिया तक सीमित वितरण; रसूखदारों को पहले खाद देने का आरोप
शिकारगंज (चंदौली)। खरीफ सीजन के बीच शिकारगंज क्षेत्र में खाद संकट गहराता जा रहा है। बुधवार सुबह शिकारगंज सहकारी समिति पर खाद लेने के लिए किसानों की लंबी कतार लग गई। एक ओर सूखे की मार से जूझ रहे किसानों को अब खाद की किल्लत ने भी संकट में डाल दिया है। घंटों लाइन में लगने के बाद भी अधिकांश किसानों को निराश लौटना पड़ रहा है।
किसान विकास मंच के नेता सरोज कुमार यादव ने आरोप लगाया कि शिकारगंज सहकारी समिति पर अब तक फास्फेटिक उर्वरक के नाम पर केवल एक ट्रक डीएपी और एक ट्रक एनपीके का ही वितरण किया गया है, जबकि इस समिति पर करीब 40 गांवों के किसान निर्भर हैं। किसानों के पास आधार कार्ड, किसान आईडी सहित सभी आवश्यक दस्तावेज होने के बावजूद पर्याप्त खाद उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी लगातार खाद की कमी न होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन शिकारगंज की स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रही है।
किसान ईश्वरी शरण सिंह ने बताया कि प्रति किसान केवल दो बोरी यूरिया दी जा रही है। उनका कहना था कि किसान खाद के लिए दिनभर दौड़-भाग कर रहे हैं, लेकिन व्यवस्था से उन्हें राहत नहीं मिल रही।
किसान संगठन मंत्री राम अवध सिंह ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में सहकारिता सहायक निबंधक रवि प्रकाश सिंह तथा एडीसीओ शशि सौरभ राय से शिकायत की। अधिकारियों ने बताया कि जैसे ही समिति सचिव मांगपत्र (चेक) लगाएंगे, तत्काल डीएपी और यूरिया उपलब्ध करा दी जाएगी तथा विभाग के स्तर पर खाद की कोई कमी नहीं है।
इस बीच किसानों ने समिति संचालक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि प्रभावशाली किसानों से पहले ही अग्रिम धनराशि लेकर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर खाद उपलब्ध कराई जाती है, जबकि छोटे और सीमांत किसानों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता है। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रति बोरी अतिरिक्त राशि लेकर खाद की ब्लैक मार्केटिंग की जा रही है।
खाद के लिए लाइन में लगे किसानों में वकील यादव, अजीत कुमार, ईश्वरी शरण सिंह, रामकरण चौहान, आदित्य मौर्य, सरोज कुमार यादव, गुरुचरण, राम किशुन, असलम खान और राम अवध सिंह सहित अनेक किसान शामिल रहे।
अब सवाल यह है कि यदि विभाग के अनुसार खाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, तो शिकारगंज समिति पर किसानों को खाद के लिए घंटों लाइन क्यों लगानी पड़ रही है? यदि किसानों के आरोप सही हैं तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी? खरीफ की बुवाई के इस महत्वपूर्ण समय में प्रशासन को इन सवालों का जवाब देना ही होगा।




