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चंदौली

चकिया: गोगहरा में मनरेगा का ‘भूतिया साम्राज्य’! 75 अदृश्य मजदूरों के नाम पर सरकारी खजाने की लूट

मनरेगा में पारदर्शिता और ग्रामीणों को रोजगार देने के सरकारी दावों की पोल चकिया विकासखंड के गोगहरा गांव में खुलती दिखाई दे रही है।

गोगहरा में मनरेगा का खेल! 75 ‘कागजी मजदूरों’ के सहारे सरकारी धन की निकासी का आरोप

चकिया, चंदौली। मनरेगा में पारदर्शिता और ग्रामीणों को रोजगार देने के सरकारी दावों की पोल चकिया विकासखंड के गोगहरा गांव में खुलती दिखाई दे रही है। यहां मनरेगा कार्यों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि गांव में 75 मजदूर केवल कागजों में ही काम कर रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।

सूत्रों के अनुसार एक ही कार्य के लिए आठ मस्टररोल जारी किए गए हैं, जिनमें कुल 75 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज दिखाई गई है। सवाल यह है कि आखिर इतने मजदूर कब और कहां कार्य कर रहे हैं? ग्रामीणों का आरोप है कि कार्यस्थल पर मजदूरों की मौजूदगी नहीं दिखती, फिर भी हाजिरी नियमित रूप से अपडेट की जा रही है।

सबसे गंभीर मामला नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (NMMS) ऐप से जुड़ा है। नियमों के मुताबिक मजदूरों की कार्यस्थल पर तस्वीर अपलोड किए बिना उपस्थिति दर्ज नहीं की जा सकती, लेकिन गोगहरा में कथित रूप से बिना फोटो अपलोड किए ही हाजिरी भर दी गई। यदि यह आरोप सही है तो यह केवल अनियमितता नहीं, बल्कि सुनियोजित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा अब मजदूरों को रोजगार देने की योजना कम और कागजी आंकड़ों के सहारे सरकारी धन निकालने का माध्यम अधिक बनती जा रही है। एक तरफ वास्तविक जरूरतमंद रोजगार के लिए भटक रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कागजों में मजदूरों की फौज खड़ी कर लाखों रुपये के भुगतान की तैयारी की जा रही है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक ही कार्य के लिए बार-बार मस्टररोल जारी हो रहे हैं और बिना फोटो के उपस्थिति दर्ज हो रही है, तो ब्लॉक स्तर से लेकर जिला स्तर तक जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे हैं? क्या यह सब उनकी जानकारी के बिना संभव है, या फिर भ्रष्टाचार की इस पूरी व्यवस्था पर किसी का संरक्षण प्राप्त है?

गोगहरा का मामला केवल एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मनरेगा की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। अब आवश्यकता है कि जिला प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए, मस्टररोल, उपस्थिति और भुगतान अभिलेखों का सत्यापन करे तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करे। अन्यथा मनरेगा में पारदर्शिता के दावे केवल सरकारी फाइलों तक ही सीमित रह जाएंगे।

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