शहाबगंज: रोहाखी में क्षेत्र पंचायत और ग्राम पंचायत पर मनरेगा घोटाले के आरोप, 390 ‘कागजी मजदूरों’ से सरकारी धन की बंदरबांट
शहाबगंज विकासखंड के रोहाखी गांव में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

रोहाखी में मनरेगा पर ‘कागजी मजदूरों’ का खेल, 390 श्रमिकों की हाजिरी, जमीन पर काम नदारद होने के आरोप
चंदौली। शहाबगंज विकासखंड के रोहाखी गांव में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के अनुसार, विकास कार्यों के नाम पर सैकड़ों मजदूरों की उपस्थिति कागजों में दर्ज की जा रही है, जबकि मौके पर वास्तविक श्रम और कार्य की स्थिति मेल नहीं खाती।
आरोप है कि क्षेत्र पंचायत और ग्राम पंचायत के माध्यम से संचालित नौ कार्यों के लिए 42 मस्टररोल जारी किए गए हैं, जिनमें कुल 390 मजदूरों की हाजिरी दर्ज दिखाई गई है। स्थानीय लोगों का दावा है कि स्थल पर इतने मजदूर कार्य करते दिखाई नहीं देते और कई जगह काम नगण्य या शून्य है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना के उद्देश्य पर सीधा प्रहार होगा।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मस्टररोल में सैकड़ों मजदूर दर्ज हैं, तो मौके पर उनका सत्यापन किसने किया? क्या संबंधित अधिकारियों ने कार्यस्थलों का भौतिक निरीक्षण किया? क्या जियो-टैगिंग, उपस्थिति सत्यापन और भुगतान प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हुई? यदि नहीं, तो सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराना और टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण करना है, लेकिन यदि कागजों पर ही मजदूर खड़े कर भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है, तो इसका नुकसान न केवल सरकारी खजाने को बल्कि उन वास्तविक श्रमिकों को भी होता है, जिनके लिए यह योजना बनाई गई थी।
यह मामला पारदर्शिता और जवाबदेही की भी परीक्षा है। जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को चाहिए कि रोहाखी गांव में चल रहे सभी मनरेगा कार्यों की स्वतंत्र जांच कराई जाए, मस्टररोल का भौतिक सत्यापन कराया जाए, कार्यस्थलों का निरीक्षण हो और यदि अनियमितताएं सिद्ध होती हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों व संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमों के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सरकारी योजनाएं जनता के भरोसे से चलती हैं। यदि कागजों पर मजदूर और फाइलों में विकास दिखाकर धन निकाला जा रहा है, तो यह सिर्फ वित्तीय अनियमितता नहीं बल्कि ग्रामीण विकास की अवधारणा के साथ भी गंभीर खिलवाड़ है।




