Welcome to Hindvani Times   Click to listen highlighted text! Welcome to Hindvani Times
चंदौली

चकिया: हाल ही में भाजपा में शामिल महिला की सक्रियता पर ग्रामीणों के सवाल, ग्रामीण बोले बैनर और प्रचार से नहीं मिलता जनादेश, वर्षों तक जनता के बीच रहकर संघर्ष करना असली राजनीति

हाल ही में भाजपा में शामिल महिला की सक्रियता पर ग्रामीणों के सवाल

ग्रामीण बोले बैनर और प्रचार से नहीं मिलता जनादेश

चकिया में चुनावी दावेदारी पर सियासी घमासान

चकिया, चंदौली। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर चकिया में सियासी सरगर्मी अभी से तेज होने लगी है। संभावित दावेदारों की सक्रियता के बीच अब जमीनी संघर्ष बनाम अचानक बढ़ी राजनीतिक सक्रियता का सवाल भी चर्चा में है। क्षेत्र के कुछ ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर एक महिला संभावित दावेदार को लेकर खुलकर नाराजगी जताई है। ग्रामीणों का दावा है कि संबंधित महिला ने हाल में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है और अब चकिया विधानसभा से चुनावी तैयारी में जुटी हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव आने से कुछ महीने पहले क्षेत्र में बैनर लगाकर सक्रियता दिखाना आसान है, लेकिन वर्षों तक जनता के बीच रहकर संघर्ष करना असली राजनीति है। उनका दावा है कि चकिया की जनता ऐसे चेहरे को अधिक महत्व देगी, जिसने गरीबों, किसानों और आम लोगों के सुख-दुख में लगातार साथ दिया हो।

प्रचार बड़ा या जनाधार

कुछ ग्रामीणों ने संभावित दावेदार पर धनबल के सहारे टिकट हासिल करने की कोशिश का आरोप भी लगाया है। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इसके समर्थन में कोई दस्तावेज सामने नहीं आया है। बावजूद इसके, इस तरह की चर्चाओं ने स्थानीय राजनीति में सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि राजनीतिक दल का टिकट किसी बैनर, प्रचार या आर्थिक ताकत से तय नहीं होता। संगठन में वर्षों का काम, नेतृत्व का विश्वास और जनता के बीच स्वीकार्यता ही किसी दावेदार की वास्तविक राजनीतिक ताकत होती है।

टिकट मिल भी गया तो जनता का भरोसा कौन देगा

ग्रामीणों का सबसे तीखा सवाल यही है कि मान लीजिए किसी संभावित दावेदार को पार्टी का टिकट मिल भी जाता है, लेकिन क्या टिकट अपने आप जनता का वोट भी दिला देगा, उनका कहना है कि चुनावी मैदान में उतरने वाले हर चेहरे को जनता के बीच अपने काम और राजनीतिक विश्वसनीयता का हिसाब देना होगा।

बहुजन समाज से जुड़े कुछ ग्रामीणों ने भी संभावित दावेदार के समर्थन में मतदान नहीं करने की बात कही है। हालांकि इसे पूरे बहुजन समाज की राय नहीं माना जा सकता, लेकिन इससे इतना जरूर संकेत मिलता है कि संभावित दावेदारों के सामने सामाजिक स्वीकार्यता की चुनौती भी कम नहीं होगी।

चकिया में पोस्टर नहीं, जमीन तय करेगी तस्वीर

अभी चुनाव दूर है, टिकट की आधिकारिक घोषणा भी नहीं हुई है और राजनीतिक समीकरण आने वाले महीनों में कई बार बदल सकते हैं। लेकिन ग्रामीणों की प्रतिक्रिया ने संभावित दावेदारों के सामने एक स्पष्ट सवाल जरूर खड़ा कर दिया है, क्या राजनीति सिर्फ चुनावी मौसम में दिखाई देने से चल सकती है‌।

चकिया की सियासत में अब असली मुकाबला बैनर, प्रचार और दावेदारी से आगे बढ़कर जनता के बीच मौजूदगी, संघर्ष और भरोसे का होगा। क्योंकि टिकट पार्टी दे सकती है, प्रचार धन से हो सकता है, लेकिन जनादेश केवल जनता देती है। और 2027 में चकिया का मतदाता किसे स्वीकार करेगा, इसका अंतिम फैसला किसी दावे या बैनर से नहीं, बल्कि मतपेटी से होगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!