चंदौली

चकिया: स्वतंत्रता दिवस पर ‘सासू के नखरा, ससुरा में झेलही के पड़ी’ गाने पर छात्रों का डांस, बैजू बाबा इंटर कॉलेज में उठे सवाल

स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर जहां विद्यालयों में देशभक्ति और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कार्यक्रमों की अपेक्षा रहती है, वहीं चकिया क्षेत्र के शिकारगंज स्थित बैजू बाबा इंटर कॉलेज में शनिवार को आयोजित समारोह में भोजपुरी गाने पर छात्रों के डांस को लेकर सवाल खड़े हो गए।

स्वतंत्रता दिवस पर ‘सासू के नखरा, ससुरा में झेलही के पड़ी’ गाने पर छात्रों का डांस, बैजू बाबा इंटर कॉलेज में उठे सवाल

चंदौली। स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर जहां विद्यालयों में देशभक्ति और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कार्यक्रमों की अपेक्षा रहती है, वहीं चकिया क्षेत्र के शिकारगंज स्थित बैजू बाबा इंटर कॉलेज में शनिवार को आयोजित समारोह में भोजपुरी गाने पर छात्रों के डांस को लेकर सवाल खड़े हो गए। कार्यक्रम में सासू के नखरा, ससुरा में झेलही के पड़ी, केतनो तू करबू पढ़ाई रोटियां बेलही के पड़ी गीत बजाया गया। इस पर छात्रों ने डांस किया। कुछ लोगों ने गीत को लेकर आपत्ति भी जताई, लेकिन आरोप है कि विरोध के बावजूद गीत बजता रहा।

स्वतंत्रता दिवस का मंच देश के स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान को याद करने तथा विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम की भावना जगाने का अवसर होता है। ऐसे में समारोह में गीतों के चयन को लेकर भी विद्यालय प्रबंधन से अपेक्षित संवेदनशीलता की उम्मीद रहती है। कार्यक्रम में देशभक्ति गीतों और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बजाय उक्त भोजपुरी गीत बजाए जाने को लेकर मौजूद लोगों में चर्चा शुरू हो गई।

विरोध के बाद भी नहीं बदला गीत

कार्यक्रम के दौरान कुछ लोगों ने गीत को लेकर आपत्ति जताई और इसे बदलने की बात कही। इसके बावजूद गीत बजाए जाने और छात्रों के डांस जारी रहने को लेकर आयोजकों की भूमिका पर सवाल उठने लगे। लोगों का कहना था कि राष्ट्रीय पर्व के कार्यक्रम में गीतों के चयन से पहले उनकी विषयवस्तु और संदेश पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए था।

विद्यालयी मंच पर मनोरंजन की सीमा पर सवाल

विद्यालय विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के साथ संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी सीखने का भी स्थान है। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस जैसे अवसर पर प्रस्तुत किए जाने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उद्देश्य भी विद्यार्थियों में देशप्रेम, सामाजिक चेतना और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करना होना चाहिए। इसी वजह से उक्त गीत के चयन और विरोध के बाद भी उसे जारी रखने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

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