Chakia: शिक्षा की आड़ में मौत का इंतजाम, चकिया में धड़ल्ले से चल रहे अवैध कोचिंग सेंटरों पर प्रशासन क्यों खामोश!
चकिया नगर और आसपास के क्षेत्रों में शिक्षा के नाम पर कथित तौर पर नियमों को ताक पर रखकर कोचिंग सेंटरों और लाइब्रेरियों का संचालन किया जा रहा है।

शिक्षा की आड़ में मौत का इंतजाम, चकिया में धड़ल्ले से चल रहे अवैध कोचिंग सेंटरों पर प्रशासन क्यों खामोश!
चकिया, चंदौली। चकिया नगर और आसपास के क्षेत्रों में शिक्षा के नाम पर कथित तौर पर नियमों को ताक पर रखकर कोचिंग सेंटरों और लाइब्रेरियों का संचालन किया जा रहा है। सवाल यह है कि आखिर किसके संरक्षण में बिना आवश्यक अनुमति और सुरक्षा मानकों के ऐसे संस्थान फल-फूल रहे हैं और जिम्मेदार विभाग अब तक मौन क्यों हैं।
मुंसफ कोर्ट के सामने की गली से लेकर मुहम्मदाबाद, सहदुल्लापुर, हेतिमपुर, शिकारगंज, बबुरी, इलिया, शहाबगंज, सैदूपुर और अन्य इलाकों में कई कोचिंग सेंटर बेसमेंट, तंग गलियों तथा दूसरी-तीसरी मंजिलों पर संचालित होने के आरोपों के बीच चर्चा में हैं। यदि इन संस्थानों के पास आवश्यक स्वीकृतियां, भवन सुरक्षा प्रमाणन और अग्निशमन इंतजाम नहीं हैं, तो यहां रोजाना पढ़ने आने वाले छात्रों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि छात्रों से मोटी फीस वसूली जाती है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर स्थिति बेहद कमजोर है। कई स्थानों पर आपातकालीन निकास, अग्निशमन यंत्र, भीड़ प्रबंधन और आपदा से निपटने की बुनियादी तैयारियों का अभाव बताया जाता है। ऐसे में किसी भी अप्रत्याशित घटना की कीमत मासूम छात्र-छात्राओं को चुकानी पड़ सकती है।
सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक जवाबदेही का है। क्या संबंधित विभागों ने कभी इन संस्थानों का व्यापक सत्यापन अभियान चलाया, क्या भवनों की क्षमता, सुरक्षा मानकों और वैधानिक अनुमतियों की जांच की गई, यदि नहीं, तो यह चूक भविष्य में किसी बड़े हादसे की भूमिका तैयार कर सकती है।
जरूरत इस बात की है कि जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग, स्थानीय निकाय और अग्निशमन विभाग संयुक्त रूप से विशेष अभियान चलाकर सभी कोचिंग सेंटरों और लाइब्रेरियों की जांच करें। जिन संस्थानों के पास आवश्यक अनुमति, सुरक्षा व्यवस्था या वैधानिक दस्तावेज नहीं हैं, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए और छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
किसी भी त्रासदी के बाद कार्रवाई करना आसान होता है, लेकिन जिम्मेदार प्रशासन वही है जो खतरे को हादसे में बदलने से पहले रोक दे। अब देखना यह है कि चकिया में नियमों की अनदेखी पर सख्ती होती है या सब कुछ यूं ही चलता रहता है।




