चकिया: टूटे तार जोड़ने में फेल जेई-एसडीओ, महादेवपुर कला को अंधेरे के भरोसे छोड़ गया विभाग, शिकायत के बाद भी नींद से नहीं जगे जिम्मेदार
डिजिटल इंडिया और 24 घंटे बिजली आपूर्ति के सरकारी दावों के बीच महादेवपुर कला गांव की हकीकत बिजली विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। बीते 13 मई को आए तेज आंधी-तूफान में गांव की एलटी लाइन के पोल और तार क्षतिग्रस्त हो गए थे।

एक माह से अंधेरे में महादेवपुर कला, बिजली विभाग की लापरवाही ने ग्रामीणों का सब्र तोड़ा
चकिया, चंदौली। डिजिटल इंडिया और 24 घंटे बिजली आपूर्ति के सरकारी दावों के बीच महादेवपुर कला गांव की हकीकत बिजली विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। बीते 13 मई को आए तेज आंधी-तूफान में गांव की एलटी लाइन के पोल और तार क्षतिग्रस्त हो गए थे। घटना के बाद विभाग ने औपचारिकता निभाते हुए पोल तो खड़ा कर दिया, लेकिन करीब एक माह बीतने के बाद भी तार नहीं जोड़ा गया और एलटी सप्लाई बहाल नहीं की गई।
स्थिति यह है कि गांव के लोग आज भी अंधेरे में जीवन बिताने को मजबूर हैं। भीषण गर्मी के बीच न बिजली है, न पंखे चल रहे हैं और न ही बच्चों की पढ़ाई सुचारू रूप से हो पा रही है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि एलटी तार आज भी सड़क किनारे गिरा पड़ा है, जो कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार चकिया पावर हाउस और संबंधित अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। न तो मौके पर कोई ठोस कार्रवाई हुई और न ही आपूर्ति बहाल करने की गंभीर कोशिश दिखाई दी। इससे लोगों में विभाग के प्रति भारी नाराजगी है।
प्रश्न यह है कि जब एक साधारण मरम्मत कार्य को पूरा करने में विभाग को एक महीना लग रहा है, तो आम जनता आपातकालीन परिस्थितियों में बिजली विभाग से क्या उम्मीद करे? विभागीय उदासीनता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पोल खड़े होने के बाद भी तार जोड़ने की जहमत नहीं उठाई गई।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते आपूर्ति बहाल नहीं की गई तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। अब निगाहें जिला प्रशासन पर हैं कि वह बिजली विभाग की इस लापरवाही का संज्ञान लेकर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करता है या फिर महादेवपुर कला के लोग यूं ही अंधेरे में रहने को मजबूर रहेंगे।




