धनावल कला गांव: मनरेगा में फोटोशाप गैंग का खेल, गूगल की तस्वीरों से मजदूर बनाकर डकारे जा रहे सरकारी धन, कागजों में दौड़ रहे मजदूर
धनावल कला गांव में मनरेगा योजना अब रोजगार नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का संगठित अड्डा बनती जा रही है। यहां विकास कार्य धरातल पर कम और सरकारी फाइलों में ज्यादा दिखाई दे रहे हैं।

मनरेगा बना “लूटरेगा” : गूगल की फोटो से भर रहे हाजिरी, कागजों में दौड़ रहे 32 मजदूर!
चकिया, चंदौली। धनावल कला गांव में मनरेगा योजना अब रोजगार नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का संगठित अड्डा बनती जा रही है। यहां विकास कार्य धरातल पर कम और सरकारी फाइलों में ज्यादा दिखाई दे रहे हैं। हालात इतने शर्मनाक हैं कि एक ही महिला की तस्वीर को अलग-अलग नामों से अपलोड कर फर्जी मजदूर तैयार किए गए हैं। इतना ही नहीं, गूगल से उठाई गई वालपेपर फोटो तक को मजदूर बताकर सरकारी खजाने पर डाका डाला जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक एक ही कार्य के लिए चार-चार मस्टररोल जारी किए गए हैं, जिनमें 32 मजदूर केवल कागजों में काम करते दिखाए गए हैं। गांव में न मजदूर दिखाई दे रहे हैं, न काम की असली तस्वीर, लेकिन पोर्टल पर सबकुछ “नियमों के अनुसार” अपडेट किया जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर बिना सत्यापन के फर्जी फोटो और फर्जी नामों से हाजिरी कैसे लग रही है? क्या जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदकर बैठे हैं या फिर यह पूरा खेल उनकी शह पर चल रहा है? मनरेगा जैसी योजना, जो गरीबों के रोजगार के लिए बनाई गई थी, अब भ्रष्टाचारियों के लिए “एटीएम मशीन” बन चुकी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि धनावल कला में लंबे समय से फर्जी मजदूरों के नाम पर भुगतान निकाला जा रहा है। असली मजदूर काम की तलाश में भटक रहे हैं, जबकि कागजों में फर्जी हाजिरी लगाकर सरकारी धन की बंदरबांट जारी है।
यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो जाए तो कई जिम्मेदारों के चेहरे बेनकाब हो सकते हैं। अब सवाल यह है कि जिला प्रशासन इस खुलासे पर कार्रवाई करेगा या फिर मनरेगा में भ्रष्टाचार की यह फाइल भी धूल फांकती रह जाएगी।




