शहाबगंज: सरकारी धन पर कागजी डाका, सुल्तानपुर में मनरेगा के नाम पर फर्जी कार्य का आरोप, BDO साहब ने कहा होगी कार्रवाई
मनरेगा बना 'कागजी रोजगार' का खेल! सुल्तानपुर में बिना काम 90 मजदूरों की हाजिरी, 10 मस्टररोल से सरकारी धन पर सवाल

मनरेगा बना ‘कागजी रोजगार’ का खेल! सुल्तानपुर में बिना काम 90 मजदूरों की हाजिरी, 10 मस्टररोल से सरकारी धन पर सवाल
चंदौली। शहाबगंज विकासखंड के सुल्तानपुर ग्राम पंचायत में मनरेगा के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि महीनों तक बिना एक भी मजदूर के काम किए कागजों में निर्माण कार्य दिखाकर मस्टररोल चलाए गए और रोजगार सृजन का रिकॉर्ड तैयार कर दिया गया। मामला सामने आने के बाद ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
आरोप है कि 24 जून तक ग्राम पंचायत की ओर से सतीश के घर से पिंटू के घर तक चकरोड़ पर मिट्टी कार्य कागजों में कराया जाता रहा, जबकि मौके पर न तो खुदाई हुई और न ही मिट्टी डालने का कोई प्रमाण मिला। ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर कार्य दिखाया गया है, वहां वास्तविकता में कोई काम नहीं हुआ। यानी सरकारी अभिलेखों में विकास हुआ, लेकिन जमीन पर सब कुछ शून्य रहा।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि महज दो कार्यों के लिए 10 मस्टररोल जारी किए गए, जिनमें 90 मजदूरों के काम करने का विवरण दर्ज किया गया। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल फर्जी हाजिरी का मामला नहीं, बल्कि मनरेगा की पारदर्शिता और सरकारी धन के दुरुपयोग पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।
स्थानीय ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई तथा सरकारी धन की रिकवरी की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो मनरेगा का उद्देश्य ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगा।
इस संबंध में खंड विकास अधिकारी दिनेश सिंह ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी। यदि मौके पर कार्य नहीं मिला और अनियमितता सिद्ध हुई तो पूरे कार्य को शून्य करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार और गांवों में स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण है, लेकिन यदि कागजों में ही मजदूर, मस्टररोल और विकास कार्य चलते रहे तो यह योजना अपने मूल उद्देश्य से भटक जाएगी। अब निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं कि वह इस कथित घोटाले की सच्चाई सामने लाकर दोषियों पर कार्रवाई करता है या मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाता है।




