शहाबगंज: 463 मजदूरों की ‘कागजी फौज’! रोहांखी में 50 मस्टररोल पर भ्रष्टाचार का खेल, रात के अंधेरे में चढ़ रही हाजिरी, कमिशन खा चुके अधिकारी मौन, सोशल आडिट से खुलेगी पोल

463 मजदूरों की ‘कागजी फौज’! रोहांखी में 50 मस्टररोल पर भ्रष्टाचार का खेल, रात के अंधेरे में चढ़ रही हाजिरी
शहाबगंज (चंदौली)। शहाबगंज विकासखंड के रोहांखी गांव में वीबीजीरामजी (वीबी जी राम जी) योजना के तहत विकास कार्यों की आड़ में बड़े पैमाने पर कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरोप है कि महज छह कार्यों के लिए 50 मस्टररोल जारी कर 463 मजदूरों की हाजिरी दर्ज कर दी गई, जबकि मौके पर मजदूरों की संख्या नाममात्र बताई जा रही है। इससे सरकारी धन के दुरुपयोग और फर्जी भुगतान की आशंका गहरा गई है।
ग्रामीणों के अनुसार गांव में नाली और तालाब खोदाई के कार्य चल रहे हैं, लेकिन कार्यस्थल पर इतनी बड़ी संख्या में मजदूर कभी दिखाई नहीं देते, जितनी संख्या सरकारी अभिलेखों में दर्ज की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि रिकॉर्ड के अनुसार 463 मजदूर वास्तव में काम कर रहे होते, तो पूरा कार्यस्थल मजदूरों से भरा नजर आता।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी आधी रात में अपलोड की जा रही है, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि यह खेल बिना जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत के संभव नहीं है।
प्रदेश सरकार मनरेगा और ग्रामीण विकास योजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए लगातार सख्त कदम उठा रही है, लेकिन रोहांखी का मामला इन प्रयासों को चुनौती देता दिखाई पड़ रहा है। आरोप है कि स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी शिकायतों के बावजूद कार्रवाई करने के बजाय भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने में लगे हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब रिकॉर्ड में 463 मजदूर काम कर रहे हैं, तो मौके पर उनकी मौजूदगी क्यों नहीं दिखती, यदि मजदूरों की संख्या कागजों तक सीमित है, तो सरकारी धन किसके खाते में जा रहा है।
ग्रामीणों ने पूरे मामले की जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच, मस्टररोल, ऑनलाइन उपस्थिति (एनएमएमएस) और भुगतान अभिलेखों की तकनीकी जांच, सोशल आडिट कराकर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।




