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चंदौली

शहाबगंज: मनरेगा में ‘कागजी मजदूरों’ का खेल! बड़ौरा में बिना फोटो अपलोड 106 श्रमिकों की हाजिरी, एक काम पर 6 मस्टररोल से उठा बड़ा सवाल, कार्रवाई के बजाय संरक्षण

शहाबगंज विकासखंड के बड़ौरा गांव में मनरेगा योजना के नाम पर बड़ा खेल सामने आया है। यहां सरकारी अभिलेखों में 106 मजदूरों से कार्य कराए जाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है।

मनरेगा में ‘कागजी मजदूरों’ का खेल! बड़ौरा में बिना फोटो अपलोड 106 श्रमिकों की हाजिरी, एक काम पर 6 मस्टररोल से उठा बड़ा सवाल

चंदौली। शहाबगंज विकासखंड के बड़ौरा गांव में मनरेगा योजना के नाम पर बड़ा खेल सामने आया है। यहां सरकारी अभिलेखों में 106 मजदूरों से कार्य कराए जाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि मजदूर केवल कागजों में काम कर रहे हैं, जबकि मौके पर श्रमिकों की मौजूदगी शून्य है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि एक ही कार्य के लिए कुल 6 मस्टररोल जारी किए गए हैं। इससे मनरेगा कार्यों में फर्जीवाड़े और सरकारी धन के बंदरबांट की आशंका और गहरा गई है। ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा साइट पर मजदूरों की हाजिरी तो दर्ज कर दी गई, लेकिन अधिकांश श्रमिकों की फोटो तक अपलोड नहीं की गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर बिना फोटो सत्यापन के भुगतान प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ाई जा रही है?

ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में वास्तविक मजदूरों से कार्य नहीं कराया जा रहा, बल्कि कागजों में फर्जी नाम चढ़ाकर सरकारी धन निकाला जा रहा है। मजदूरों की उपस्थिति और कार्यस्थल की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए शासन द्वारा ऑनलाइन फोटो अपलोड की व्यवस्था लागू की गई थी, लेकिन बड़ौरा में इसी नियम को दरकिनार कर दिया गया।

मामले को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि भीषण गर्मी और 44 डिग्री तापमान में आम जनता परेशान है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी एसी कमरों में बैठकर शिकायतों पर आंख मूंदे हुए हैं। आरोप यह भी है कि कमीशनखोरी के चलते अधिकारी पूरे मामले पर मौन साधे हुए हैं और भ्रष्टाचार पर कार्रवाई करने के बजाय उसे संरक्षण दिया जा रहा है।

मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना, जिसका उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना है, वही अब भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की भेंट चढ़ती दिखाई दे रही है। यदि समय रहते उच्चस्तरीय जांच नहीं हुई तो सरकारी धन की लूट का यह खेल और गहराता जाएगा। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।

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