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चंदौली

100 केवीए हटाकर 63 केवीए ठोंक दिया, इनायतपुर में बिजली विभाग का करंट खेल, ग्रामीण भड़के

इनायतपुर गांव में बिजली विभाग की मनमानी का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सैकड़ों घरों की बिजली व्यवस्था पर सीधा झटका दे दिया है। गांव में लगा 100 केवीए का ट्रांसफार्मर, जो लंबे समय से सुचारु आपूर्ति दे रहा था, उसे अवर अभियंता दाल चन्द द्वारा अचानक हटाकर उसकी जगह 63 केवीए का ट्रांसफार्मर लगा दिया गया वह भी बिना किसी सूचना के।

100 केवीए हटाकर 63 केवीए ठोंक दिया, इनायतपुर में बिजली विभाग का करंट खेल, ग्रामीण भड़के

कमालपुर, चन्दौली। इनायतपुर गांव में बिजली विभाग की मनमानी का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सैकड़ों घरों की बिजली व्यवस्था पर सीधा झटका दे दिया है। गांव में लगा 100 केवीए का ट्रांसफार्मर, जो लंबे समय से सुचारु आपूर्ति दे रहा था, उसे अवर अभियंता दाल चन्द द्वारा अचानक हटाकर उसकी जगह 63 केवीए का ट्रांसफार्मर लगा दिया गया वह भी बिना किसी सूचना के।

ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उन्हें भनक लगी और वे मौके पर पहुंचे, तब तक विभाग की गाड़ी 100 केवीए ट्रांसफार्मर लेकर रवाना हो चुकी थी। मौके पर मौजूद लोगों ने जब अवर अभियंता से जवाब मांगा, तो उन्होंने इसे दूसरे स्थान का ट्रांसफार्मर बताकर मामला टाल दिया।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि करीब डेढ़ साल पहले ही कमालपुर चौकी के पास लगे ट्रांसफार्मर के साथ इनायतपुर का ट्रांसफार्मर भी 63 केवीए से बढ़ाकर 100 केवीए किया गया था, जो तब से लगातार चल रहा था। ऐसे में अचानक क्षमता घटाकर 63 केवीए कर देना ग्रामीणों के गले नहीं उतर रहा।

ग्रामीणों का आरोप है कि यह कोई तकनीकी मजबूरी नहीं, बल्कि विभागीय लापरवाही और मनमानी का नतीजा है। लोगों का कहना है कि आमतौर पर ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाई जाती है, घटाने का मामला पहली बार देखने को मिल रहा है।

गांव के लोगों ने अवर अभियंता दाल चन्द पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके कार्यशैली से उपभोक्ताओं को लगातार परेशानी झेलनी पड़ती है। आरोप यह भी है कि वे कई अन्य गांवों में भी ट्रांसफार्मरों की अदला-बदली कर उपभोक्ताओं को संकट में डालते रहे हैं।

इस पूरे प्रकरण को लेकर ग्रामीणों ने जिलाधिकारी का ध्यान आकृष्ट कराया है और जांच कर कार्रवाई की मांग की है। वहीं, इस संबंध में एसडीओ विद्युत से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन नहीं उठा जिससे विभाग की जवाबदेही पर और सवाल खड़े हो गए हैं।

अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर सैकड़ों घरों की बिजली जरूरतों को नजरअंदाज कर यह कटौती वाला फैसला किसके इशारे पर लिया गया?व। 

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