चकिया: मनरेगा बना लूट गारंटी योजना, इसहुल गांव में 154 फर्जी मजदूरों का खेल उजागर, एक ही कार्य पर 16 मस्टररोल, नाम अलग–चेहरे अलग, जिला पंचायत के खेल पर उठे बड़े सवाल, इस भ्रष्टाचार में जेई की भूमिका संदिग्ध
विकास और रोजगार के नाम पर चलाई जा रही मनरेगा योजना अब भ्रष्टाचारियों के लिए कमाई का जरिया बनती जा रही है।

मनरेगा बना “लूट गारंटी योजना”! इसहुल गांव में 154 फर्जी मजदूरों का खेल उजागर
एक ही कार्य पर 16 मस्टररोल, नाम अलग–चेहरे अलग, जिला पंचायत के खेल पर उठे बड़े सवाल
चकिया, चंदौली। विकास और रोजगार के नाम पर चलाई जा रही मनरेगा योजना अब भ्रष्टाचारियों के लिए कमाई का जरिया बनती जा रही है। चकिया विकासखंड अंतर्गत इसहुल गांव में जिला पंचायत द्वारा कराए जा रहे मनरेगा कार्य में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े और सरकारी धन की बंदरबांट का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक ही कार्य के लिए 16 मस्टररोल निकालकर 154 मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाई जा रही है, जबकि जमीन पर वास्तविक कार्य और मजदूरों की संख्या सवालों के घेरे में है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कई मजदूरों के नाम अलग-अलग दर्ज किए गए हैं, लेकिन फोटो एक ही व्यक्ति का लगाया गया है। कहीं नाम किसी और का है तो तस्वीर किसी दूसरे की। इससे साफ संकेत मिल रहा है कि कागजों पर मजदूरों की फौज खड़ी कर सरकारी धन का बंदरबांट किया जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जिला पंचायत के ठेकेदार खुलेआम नियमों को ताक पर रखकर मनरेगा योजना को लूट का माध्यम बना चुके हैं। बिना वास्तविक मजदूरों के मस्टररोल भरकर भुगतान निकालने का खेल लंबे समय से चल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर निष्पक्ष जांच हो जाए तो करोड़ों के फर्जीवाड़े का खुलासा हो सकता है।
इस पूरे मामले में जिला पंचायत के संबंधित जेई की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। सवाल उठ रहा है कि आखिर बिना अधिकारियों की मिलीभगत के इतने बड़े स्तर पर फर्जी मस्टररोल और भुगतान का खेल कैसे संभव है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर जाकर कार्य का सत्यापन किया, या फिर सब कुछ “कमीशन व्यवस्था” के तहत कागजों में ही निपटा दिया गया?
मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना, जिसका उद्देश्य गरीबों को रोजगार देना था, अब भ्रष्ट तंत्र की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। सरकारी पोर्टल पर अपलोड की जा रही फर्जी उपस्थिति और संदिग्ध फोटो व्यवस्था ने पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में कार्रवाई करता है या फिर हर बार की तरह जांच के नाम पर फाइलें दबा दी जाएंगी। ग्रामीणों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।




