Welcome to Hindvani Times   Click to listen highlighted text! Welcome to Hindvani Times
चंदौली

चकिया: ईंट-भट्ठों पर बचपन की राख… कानून धुआं बनकर उड़ गया, चकिया में बाल मजदूरी का काला कारोबार, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल, कनक ईंट भट्ठे का मामला

गांधीनगर भटपुरवा गांव में संचालित कनक ईंट-भट्ठों पर इंसानियत शर्मसार होती दिख रही है। जिन मासूम हाथों में किताबें और कॉपियां होनी चाहिए थीं, वे हाथ आज फावड़ा और कच्ची ईंट ढोने को मजबूर हैं।

“ईंट-भट्ठों पर बचपन की राख… कानून धुआं बनकर उड़ गया!”

चकिया में बाल मजदूरी का काला कारोबार, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

चकिया, चंदौली। गांधीनगर भटपुरवा गांव में संचालित कनक ईंट-भट्ठों पर इंसानियत शर्मसार होती दिख रही है। जिन मासूम हाथों में किताबें और कॉपियां होनी चाहिए थीं, वे हाथ आज फावड़ा और कच्ची ईंट ढोने को मजबूर हैं। क्षेत्र के दर्जनों ईंट-भट्ठों पर खुलेआम बाल मजदूरी कराई जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखों पर पट्टी बांधे बैठे हैं।

सुबह की पहली किरण के साथ मासूम बच्चे भट्ठों की आग में अपना बचपन झोंकने निकल पड़ते हैं। 10 से 14 वर्ष तक के बच्चे ईंट पाथने, मिट्टी ढोने और अन्य भारी कामों में लगाए जा रहे हैं। तपती धूप, धुएं और धूल के बीच ये बच्चे मजदूर बन चुके हैं, जबकि सरकार शिक्षा के नाम पर करोड़ों खर्च करने का दावा कर रही है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर श्रम विभाग, प्रशासन और बाल संरक्षण इकाइयों की नजर इन भट्ठों तक क्यों नहीं पहुंच रही, क्या अधिकारियों को यह अमानवीय खेल दिखाई नहीं दे रहा, या फिर सबकुछ सेटिंग के सहारे चल रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। भट्ठा मालिक बेखौफ होकर बाल श्रम कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं। गरीब परिवारों की मजबूरी का फायदा उठाकर बच्चों से दिनभर मजदूरी कराई जा रही है और बदले में उनके भविष्य को अंधेरे में धकेला जा रहा है।

कानून क्या कहता है?

बाल श्रम प्रतिषेध एवं विनियमन अधिनियम 1986 के तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से खतरनाक कार्य कराना पूरी तरह प्रतिबंधित है। ईंट-भट्ठा श्रम की श्रेणी में आने वाला कार्य बच्चों के स्वास्थ्य और जीवन दोनों के लिए गंभीर खतरा माना जाता है। इसके बावजूद क्षेत्र में यह अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है।

सवालों के घेरे में प्रशासन

जब सरकार “स्कूल चलो अभियान” चला रही है, तब चकिया के भट्ठों पर “मजदूरी करो अभियान” आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है, क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे या मीडिया के दबाव का इंतजार कर रहा है।

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी भट्ठा संचालकों और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि भट्ठों की आग में झुलस रहा मासूम बचपन बचाया जा सके।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!