चंदौली

शहाबगंज: मसोई में मनरेगा बना ‘लूट का खेल’! कागजों में दौड़ रहे 259 मजदूर, 31 मस्टररोल पर उठे सवाल

शहाबगंज विकासखंड के मसोई गांव में मनरेगा योजना के नाम पर बड़े पैमाने पर धांधली का मामला सामने आया है। गांव में विकास कार्यों से ज्यादा कागजी खेल चलता दिखाई दे रहा है।

मसोई में मनरेगा बना ‘लूट का खेल’! कागजों में दौड़ रहे 259 मजदूर, 31 मस्टररोल पर उठे सवाल

चंदौली। शहाबगंज विकासखंड के मसोई गांव में मनरेगा योजना के नाम पर बड़े पैमाने पर धांधली का मामला सामने आया है। गांव में विकास कार्यों से ज्यादा कागजी खेल चलता दिखाई दे रहा है। आरोप है कि यहां 259 मजदूर केवल दस्तावेजों में कार्य कर रहे हैं, जबकि धरातल पर कई कार्यों की स्थिति बेहद संदिग्ध है। मामले ने ग्रामीणों के बीच आक्रोश पैदा कर दिया है।

जानकारी के अनुसार गांव में कुल 9 कार्यों के लिए 31 मस्टररोल जारी किए गए हैं। इतने बड़े पैमाने पर मस्टररोल निकलने के बाद अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर कार्यस्थलों पर मजदूर कहां हैं और किस आधार पर भुगतान की प्रक्रिया चलाई जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि मनरेगा को रोजगार योजना के बजाय “कागजी कमाई” का जरिया बना दिया गया है।

सूत्रों की मानें तो कई ऐसे नाम भी मस्टररोल में दर्ज हैं, जो कभी कार्यस्थल पर दिखाई ही नहीं दिए। वहीं कुछ ग्रामीणों का कहना है कि बिना काम किए ही हाजिरी भरने और भुगतान निकालने का खेल लंबे समय से चल रहा है। इससे वास्तविक जरूरतमंद मजदूरों का हक मारा जा रहा है।

गांव में चल रहे कार्यों की स्थिति भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि कहीं अधूरे कार्यों को पूर्ण दिखाया जा रहा है तो कहीं मजदूरों की संख्या बढ़ाकर सरकारी धन के बंदरबांट की तैयारी की गई है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो मनरेगा में हुए फर्जीवाड़े की परतें खुल सकती हैं। सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता के दावे के बीच मसोई गांव का मामला प्रशासनिक निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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