Welcome to Hindvani Times   Click to listen highlighted text! Welcome to Hindvani Times
चंदौली

शहाबगंज: अरारी में मनरेगा या कागजी मजदूरों की फौज? 249 श्रमिकों की हाजिरी, जमीन पर काम शून्य!

शहाबगंज विकासखंड के अरारी गांव में मनरेगा योजना की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि जहां सरकारी अभिलेखों में 249 मजदूरों के कार्यरत होने का दावा किया जा रहा है, वहीं धरातल पर कार्य पूरी तरह शून्य दिखाई दे रहा है।

अरारी में मनरेगा या कागजी मजदूरों की फौज? 249 श्रमिकों की हाजिरी, जमीन पर काम शून्य!

चंदौली। शहाबगंज विकासखंड के अरारी गांव में मनरेगा योजना की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि जहां सरकारी अभिलेखों में 249 मजदूरों के कार्यरत होने का दावा किया जा रहा है, वहीं धरातल पर कार्य पूरी तरह शून्य दिखाई दे रहा है। स्थिति ऐसी है कि कागजों में मजदूरों की पूरी फौज खड़ी कर दी गई है, लेकिन मौके पर काम का कोई ठोस प्रमाण नजर नहीं आता।

बताया जा रहा है कि एक ही कार्य के लिए 26 मस्टररोल जारी किए गए हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब कार्यस्थल पर गतिविधियां नगण्य हैं तो आखिर इतनी बड़ी संख्या में मजदूरों की उपस्थिति किस आधार पर दर्ज की जा रही है? यदि आरोप सही हैं तो यह केवल सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला नहीं, बल्कि गरीब मजदूरों के नाम पर योजनाबद्ध तरीके से सरकारी खजाने पर डाका डालने जैसा है।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि लगातार शिकायतों और सवालों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी बनी हुई है। कार्रवाई के अभाव ने कथित भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों के हौसले बुलंद कर दिए हैं। यही कारण है कि मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना, जिसका उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना है, कुछ लोगों के लिए कमाई का जरिया बनती दिखाई दे रही है।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन और विकासखंड के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले की निष्पक्ष जांच कराएंगे, क्या मस्टररोल, मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति और भुगतान का सत्यापन होगा? या फिर सरकारी फाइलों में सब कुछ ठीक दिखाकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

अरारी का मामला केवल एक गांव का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की परीक्षा है जो भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का दावा करती है। यदि समय रहते जांच और कार्रवाई नहीं हुई तो यह संदेश जाएगा कि मनरेगा में कागजी मजदूरों के सहारे सरकारी धन की बंदरबांट करने वालों को किसी का डर नहीं है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!