Welcome to Hindvani Times   Click to listen highlighted text! Welcome to Hindvani Times
चंदौली

चकिया: पचफेडियां में मनरेगा पर डाका! कागजों में 87 मजदूर, जमीन पर काम नदारद, जिला पंचायत के कार्य में करोड़ों के खेल की आशंका, जेई व ठेकेदार मिलकर मचा रहे भ्रष्टाचार

विकास योजनाओं के नाम पर सरकारी धन के बंदरबांट का एक और मामला सामने आया है।

पचफेडियां में मनरेगा पर डाका! कागजों में 87 मजदूर, जमीन पर काम नदारद, जिला पंचायत के कार्य में करोड़ों के खेल की आशंका

चकिया, चंदौली। विकास योजनाओं के नाम पर सरकारी धन के बंदरबांट का एक और मामला सामने आया है। चकिया विकासखंड अंतर्गत पचफेडियां गांव में जिला पंचायत द्वारा कराए जा रहे मनरेगा कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितता और वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लग रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर अपेक्षित कार्य दिखाई नहीं दे रहा है, जबकि सरकारी अभिलेखों में दर्जनों मजदूरों की उपस्थिति दर्ज कर धन निकासी की जा रही है।

आरोप है कि संबंधित कार्य में एक ही काम के लिए कुल 9 मस्टररोल जारी किए गए हैं, जबकि अभिलेखों में 87 मजदूरों की प्रतिदिन उपस्थिति दर्ज दिखाई जा रही है। ग्रामीणों का दावा है कि इतनी बड़ी संख्या में मजदूर मौके पर कभी कार्य करते नहीं देखे गए। इससे मनरेगा की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, कार्य की वास्तविक प्रगति और कागजी अभिलेखों में भारी अंतर दिखाई दे रहा है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला सरकारी धन के दुरुपयोग और फर्जी भुगतान का बड़ा उदाहरण साबित हो सकता है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब कार्यस्थल पर मजदूरों की संख्या नगण्य है तो फिर मस्टररोल में दर्ज दर्जनों श्रमिकों के नाम पर भुगतान किस आधार पर किया जा रहा है।

सबसे गंभीर बात यह है कि यह कार्य जिला पंचायत के माध्यम से कराया जा रहा है। ऐसे में निगरानी और जवाबदेही की जिम्मेदारी भी संबंधित विभागीय अधिकारियों पर आती है। इसके बावजूद कथित अनियमितताओं पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना कई सवालों को जन्म दे रहा है।

ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर मस्टररोल, मजदूरों की उपस्थिति, भुगतान विवरण और कार्य की भौतिक सत्यापन रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना भ्रष्टाचारियों के लिए कमाई का जरिया बनकर रह जाएगी।

अब बड़ा सवाल यह है कि पचफेडियां में मनरेगा के नाम पर चल रहे इस कथित खेल पर प्रशासन कब कार्रवाई करेगा, या फिर कागजों में ही मजदूर काम करते रहेंगे और सरकारी खजाने से धन निकलता रहेगा। 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!