तूफान से तबाही, लेखपाल गायब: राहत के इंतजार में भटक रहे ग्रामीण
क्षेत्र में आए भीषण आंधी-तूफान ने सैकड़ों परिवारों की कमर तोड़ दी है, लेकिन प्राकृतिक आपदा के बाद प्रशासनिक संवेदनहीनता ने पीड़ितों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। घरों की छतें उड़ गईं, दीवारें ढह गईं, लाखों की संपत्ति बर्बाद हो गई, मगर नुकसान का आकलन करने और राहत दिलाने वाला जिम्मेदार लेखपाल क्षेत्र से नदारद है।

तूफान से तबाही, लेखपाल गायब: राहत के इंतजार में भटक रहे ग्रामीण
कमालपुर, चन्दौली। क्षेत्र में आए भीषण आंधी-तूफान ने सैकड़ों परिवारों की कमर तोड़ दी है, लेकिन प्राकृतिक आपदा के बाद प्रशासनिक संवेदनहीनता ने पीड़ितों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। घरों की छतें उड़ गईं, दीवारें ढह गईं, लाखों की संपत्ति बर्बाद हो गई, मगर नुकसान का आकलन करने और राहत दिलाने वाला जिम्मेदार लेखपाल क्षेत्र से नदारद है।
कमालपुर क्षेत्र के नौरंगाबाद, कादिराबाद, हेतमपुर, इनायतपुर, कमालपुर कस्बा समेत कई गांवों में तूफान ने भारी तबाही मचाई। कहीं करकट उड़ गए तो कहीं मकानों की दीवारें भरभराकर गिर गईं। ग्रामीणों के अनुसार इनायतपुर में बसंत राजभर, जफर इकबाल अंसारी, बाबू हाशमी, विष्णु दत्त पाठक, प्रभु नारायण पाठक, अख्तर अली पप्पू समेत दर्जनों लोगों को भारी नुकसान हुआ है।
वहीं नौरंगाबाद निवासी डॉ. जब्बार अंसारी का डेढ़ लाख रुपये से अधिक मूल्य का करकट नुमा मकान, वेल्डिंग मशीन और अन्य सामान बर्बाद हो गया। कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि आपदा के बाद हल्का लेखपाल को फोन से सूचना देने की कोशिश की गई, लेकिन इनायतपुर, नौरंगाबाद और बभनियाव क्षेत्र के लेखपाल ने फोन तक रिसीव नहीं किया। इससे लोगों में भारी नाराजगी है।
ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित लेखपाल न तो गांव में दिखाई देता है और न ही जरूरत पड़ने पर फोन उठाता है। छोटे-छोटे कामों के लिए भी लोगों को तहसील के चक्कर काटने पड़ते हैं। अब जब आपदा आई है तो पीड़ितों को राहत के बजाय उपेक्षा मिल रही है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी चन्दौली से मांग की है कि तत्काल नुकसान का सर्वे कराया जाए, पीड़ितों को मुआवजा दिया जाए तथा लापरवाह लेखपाल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। प्रशासन की देरी कहीं पीड़ितों के जख्म और गहरे न कर दे।




