शहाबगंज: बसाढ़ी गांव, अमृत सरोवर या भ्रष्टाचार का तालाब, 12 मस्टररोल में 105 मजदूरों का दावा, मनरेगा में कार्य नहीं करने वाली महिलाओं की तस्वीर हो रही अपडेट
शहाबगंज विकासखंड अंतर्गत बसाढ़ी गांव में मनरेगा योजना के तहत भगत सिंह अमृत सरोवर का निर्माण कार्य भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की भेंट चढ़ता दिखाई दे रहा है।

दर्जन भर मजदूर, कागजों में 105 की हाजिरी! बसाढ़ी के अमृत सरोवर में मनरेगा बना ‘फर्जीवाड़े का सरोवर’
चंदौली। शहाबगंज विकासखंड अंतर्गत बसाढ़ी गांव में मनरेगा योजना के तहत भगत सिंह अमृत सरोवर का निर्माण कार्य भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की भेंट चढ़ता दिखाई दे रहा है। मौके पर जहां मुश्किल से दर्जन भर मजदूर कार्य करते नजर आते हैं, वहीं सरकारी अभिलेखों में 105 मजदूरों की हाजिरी दर्ज कर भुगतान की तैयारी की जा रही है। जो मजदूर मनरेगा में कार्य नहीं करते हैं उनके भी मस्टररोल व फोटो का इस्तेमाल किया जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार एक ही कार्य के लिए 12 मस्टररोल जारी किए गए हैं। सवाल यह है कि जब कार्यस्थल पर इतनी संख्या में मजदूर मौजूद ही नहीं हैं तो आखिर कागजों में सैकड़ों मजदूरों की उपस्थिति किस आधार पर दर्ज की जा रही है? इससे मनरेगा में बड़े पैमाने पर फर्जी भुगतान और सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका गहरा गई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी आंखें मूंदकर मस्टररोल अपडेट कर रहे हैं। यदि मौके पर नियमित निरीक्षण किया जाए तो पूरे खेल का पर्दाफाश हो सकता है। मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना है, लेकिन बसाढ़ी में यह योजना कुछ लोगों के लिए कमाई का जरिया बनती नजर आ रही है।
ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच ईमानदारी से हुई तो फर्जी हाजिरी, फर्जी मस्टररोल और भुगतान घोटाले की कई परतें खुल सकती हैं।
इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच कराई जाएगी और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब जमीन पर मजदूर नहीं हैं तो कागजों में 105 मजदूर कहां से आ गए? और आखिर किसके संरक्षण में मनरेगा की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करने वाला यह खेल चल रहा है।



