मौत बनकर दौड़ रहे बालू ट्रक, स्कूल टाइम में सड़कों पर बच्चों की जान से खिलवाड़
अमडा–कमालपुर–सकलडीहा मार्ग एक बार फिर खतरनाक कॉरिडोर में तब्दील होता नजर आ रहा है, जहां बालू लदे ट्रकों की बेलगाम रफ्तार स्कूली बच्चों की जिंदगी पर भारी पड़ रही है।

मौत बनकर दौड़ रहे बालू ट्रक—स्कूल टाइम में सड़कों पर बच्चों की जान से खिलवाड़!”
कमालपुर, चंदौली। अमडा–कमालपुर–सकलडीहा मार्ग एक बार फिर खतरनाक कॉरिडोर में तब्दील होता नजर आ रहा है, जहां बालू लदे ट्रकों की बेलगाम रफ्तार स्कूली बच्चों की जिंदगी पर भारी पड़ रही है। अल सुबह से लेकर देर रात तक ट्रकों का अनवरत आवागमन, और वो भी ठीक स्कूल के समय यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि खुलेआम जोखिम का खेल है।
चौंकाने वाली बात यह है कि जिस समय हजारों बच्चे—कभी पैदल तो कभी साइकिल से प्राथमिक विद्यालयों से लेकर इंटर कॉलेज और डिग्री कॉलेज तक पढ़ने के लिए कमालपुर आते हैं, उसी वक्त इन भारी वाहनों की आवाजाही चरम पर रहती है। करीब 10 हजार छात्रों की मौजूदगी वाले इस मार्ग पर हर गुजरता ट्रक एक संभावित हादसे की चेतावनी देता है।
इतिहास भी गवाह है कि इसी मार्ग पर पहले कई जानलेवा हादसे हो चुके हैं, जिसके बाद जनता के चक्का जाम और धरना-प्रदर्शन के चलते ट्रकों पर रोक लगी थी। लेकिन अब वही हालात दोबारा बनते दिख रहे हैं फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार जिम्मेदार पहले से ज्यादा खामोश हैं।
स्थानीय लोगों में भय और आक्रोश साफ दिख रहा है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, या फिर बच्चों की सुरक्षा से ज्यादा अहम बालू का कारोबार हो गया है।
क्षेत्रीय जनता ने साफ मांग की है कि कम से कम स्कूल समय सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक इन भारी वाहनों की एंट्री पूरी तरह प्रतिबंधित की जाए। वरना यह सड़क कभी भी किसी मासूम की जिंदगी निगल सकती है।




