शहाबगंज: महिलाओं के अधिकारों पर प्रहार! पंचायत सहायक की कुर्सी पर बैठ पति चला रहा “सिस्टम”, मुसाखाड़ ग्राम पंचायत का मामला
सरकार जहां एक ओर महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें बराबरी का अधिकार दिलाने के लिए तमाम योजनाएं चला रही है, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। मूसाखांड ग्राम पंचायत में पंचायत सहायक के पद पर तैनात महिला कर्मचारी की जगह उसका पति प्रतिदिन कुर्सी संभालता नजर आ रहा है।

महिलाओं के अधिकारों पर प्रहार! पंचायत सहायक की कुर्सी पर बैठ पति चला रहा “सिस्टम”
➡ मूसाखांड पंचायत में महिला कर्मचारी की जगह दबंग पति का कब्जा
➡ प्रमाण पत्र के नाम पर वसूली, ग्रामीणों से अभद्र व्यवहार
➡ वायरल वीडियो से खुली “सिस्टम की सच्चाई”
चकिया, चंदौली। सरकार जहां एक ओर महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें बराबरी का अधिकार दिलाने के लिए तमाम योजनाएं चला रही है, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। मूसाखांड ग्राम पंचायत में पंचायत सहायक के पद पर तैनात महिला कर्मचारी की जगह उसका पति प्रतिदिन कुर्सी संभालता नजर आ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, संबंधित महिला पंचायत सहायक की अनुपस्थिति में उसका मनबढ़ पति न सिर्फ कार्यालय में बैठकर काम करता है, बल्कि ग्रामीणों से सीधे लेन-देन भी करता है। आरोप है कि वह प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर मनमानी रकम वसूल रहा है और गरीब जनता से ऊटपटांग भाषा में बात करता है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब वे किसी कार्य के लिए पंचायत भवन पहुंचते हैं, तो वहां महिला कर्मचारी की जगह उसका पति ही मिलता है, जो दबंगई के साथ पेश आता है। इससे लोगों में रोष व्याप्त है और महिलाओं के अधिकारों को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामले ने तूल तब पकड़ा जब पंचायत सहायक के नाम पर चल रही इस मनमानी व्यवस्था का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में स्पष्ट रूप से एक व्यक्ति को पंचायत सहायक की कुर्सी पर बैठकर कार्य करते देखा जा सकता है, जिससे पूरे मामले की पोल खुल गई है।
ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों से जांच कर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो यह भ्रष्टाचार और दबंगई का एक बड़ा उदाहरण बन जाएगा।
बड़ा सवाल
क्या महिला सशक्तिकरण केवल कागजों तक सीमित है,
क्या जिम्मेदार अधिकारी इस खुलेआम हो रहे नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करेंगे।




