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चंदौली

शहाबगंज: बरसाती पानी पर बिछ रही डामर की परत! पीडब्ल्यूडी की कार्यशैली पर उठे सवाल, गुणवत्ता की कौन लेगा गारंटी?

एक ओर लगातार हो रही बारिश से सड़कें पानी में डूबी हैं, वहीं दूसरी ओर लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की ओर से अतायस्तगंज–मचवल मार्ग पर डामरीकरण का कार्य कराया जा रहा है।

बरसाती पानी पर बिछ रही डामर की परत! पीडब्ल्यूडी की कार्यशैली पर उठे सवाल, गुणवत्ता की कौन लेगा गारंटी?

शहाबगंज, चंदौली। एक ओर लगातार हो रही बारिश से सड़कें पानी में डूबी हैं, वहीं दूसरी ओर लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की ओर से अतायस्तगंज–मचवल मार्ग पर डामरीकरण का कार्य कराया जा रहा है। सड़क पर जगह-जगह पानी जमा होने के बावजूद निर्माण कार्य जारी रहने से इसकी गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के दौरान सड़क निर्माण तकनीकी मानकों के विपरीत माना जाता है, क्योंकि भीगी सतह पर बिछाई गई डामर की परत अधिक समय तक टिकाऊ नहीं रहती। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि कुछ ही महीनों में सड़क उखड़ने लगेगी और जनता की गाढ़ी कमाई से खर्च की गई सरकारी धनराशि पर पानी फिर जाएगा।

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी और विभागीय अधिकारी गुणवत्ता की अनदेखी कर जल्दबाजी में कार्य पूरा कराने में जुटे हैं। यदि बारिश के बीच सड़क निर्माण कराया जा रहा है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि किन तकनीकी मानकों के आधार पर इसकी अनुमति दी गई और गुणवत्ता की जिम्मेदारी कौन लेगा।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विभागीय जूनियर इंजीनियर (जेई) मौके पर मौजूद हैं? यदि हैं, तो क्या उन्होंने जलभराव के बीच डामरीकरण की अनुमति दी? यदि मानकों की अनदेखी हुई है, तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

जनता का कहना है कि सड़क निर्माण केवल कागजी औपचारिकता पूरी करने का माध्यम नहीं, बल्कि वर्षों तक सुरक्षित और टिकाऊ आवागमन सुनिश्चित करने का कार्य है। ऐसे में यदि गुणवत्ता से समझौता किया गया तो इसकी सीधी कीमत आम लोगों को चुकानी पड़ेगी।

अब आवश्यकता इस बात की है कि जिलाधिकारी और लोक निर्माण विभाग के उच्च अधिकारी पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराएं, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच हो तथा यदि तकनीकी मानकों का उल्लंघन पाया जाए तो संबंधित ठेकेदार, जेई और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। सरकारी धन से बनने वाली सड़कों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार पर कठोर अंकुश लगाना समय की मांग है।

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