चकिया/बिकापुर: विधायक के गांव में मनरेगा का कागजी खेल, 33 मस्टररोल में 301 मजदूर, जमीन पर उठ रहे बड़े सवाल, कागजों में विकास की तस्वीर, धरातल पर अपेक्षित, रात में अपडेट हो रही हाजिरी, जांच की मांग
स्थानीय विकासखंड के बिकापुर गांव में मनरेगा के संचालन को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यहां विकास कार्यों से ज्यादा कागजी खानापूर्ति दिखाई दे रही है।

विधायक के गांव में मनरेगा का ‘कागजी खेल’? 33 मस्टररोल में 301 मजदूर, जमीन पर उठ रहे बड़े सवाल
चकिया, चंदौली। स्थानीय विकासखंड के बिकापुर गांव में मनरेगा के संचालन को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यहां विकास कार्यों से ज्यादा कागजी खानापूर्ति दिखाई दे रही है। दावा किया जा रहा है कि कई मजदूरों की हाजिरी बिना वास्तविक काम के दर्ज की जा रही है और सरकारी धन के उपयोग पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार गांव में पांच कार्यों के लिए 33 मस्टररोल जारी किए गए हैं, जिनमें कुल 301 मजदूरों का विवरण दर्ज है। आरोप है कि इनमें से अनेक मजदूर मौके पर काम करते नजर नहीं आते, लेकिन उनकी उपस्थिति पोर्टल पर अपडेट हो जाती है। यही नहीं, यह भी कहा जा रहा है कि कई बार हाजिरी दिन के बजाय रात के समय दर्ज की जाती है, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कागजों में विकास की तस्वीर बनाई जा रही है, जबकि धरातल पर कार्य अपेक्षित स्तर पर दिखाई नहीं देता। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मनरेगा के मूल उद्देश्य और सरकारी धन दोनों के साथ गंभीर खिलवाड़ माना जाएगा।
बिकापुर भाजपा विधायक कैलाश खरवार का गांव बताया जाता है। ऐसे में ग्रामीणों के बीच यह चर्चा है कि जब जनप्रतिनिधि के अपने गांव में ही मनरेगा को लेकर इतने सवाल उठ रहे हैं, तो जिम्मेदार विभागों की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
सरकार भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की बात करती है, लेकिन बिकापुर से उठ रही शिकायतें प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर खड़ी हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित अधिकारी मस्टररोल, हाजिरी और वास्तविक कार्यों की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाते हैं या नहीं। जनता की मांग है कि यदि अनियमितता सिद्ध हो तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर सरकारी धन की जवाबदेही तय की जाए।




