पालपुर विद्यालय में नया बवाल: प्रधानाध्यापक ने ही सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए सरकारी दस्तावेज, शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप, लटक रही कार्रवाई की तलवार
मारपीट विवाद के बाद अब लॉगबुक और शिक्षक उपस्थिति रजिस्टर सोशल मीडिया पर साझा करने का मामला गरमाया, बीएसए बोले—"जांच कर होगी कार्रवाई"

पालपुर विद्यालय में नया बवाल: प्रधानाध्यापक ने ही सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए सरकारी दस्तावेज, शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप
मारपीट विवाद के बाद अब लॉगबुक और शिक्षक उपस्थिति रजिस्टर सोशल मीडिया पर साझा करने का मामला गरमाया, बीएसए बोले जांच कर होगी कार्रवाई”
चंदौली। शहाबगंज विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय पालपुर एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। हाल ही में विद्यालय के प्रधानाध्यापक पर बच्चों के साथ मारपीट का आरोप लगा था, जिसका वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। मामला अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि अब एक नया विवाद सामने आ गया है। इस बार आरोप है कि प्रधानाध्यापक सुरेश प्रसाद ने स्वयं विद्यालय की लॉगबुक और शिक्षक उपस्थिति रजिस्टर की प्रतियां सोशल मीडिया और विभिन्न समाचार समूहों में साझा कर दीं, जिसके बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और सरकारी अभिलेखों की गोपनीयता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, विद्यालय की लॉगबुक और शिक्षक उपस्थिति रजिस्टर की तस्वीरें कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और समाचार ग्रुपों में प्रसारित हुईं। इन दस्तावेजों में विद्यालय के आंतरिक अभिलेख दर्ज हैं, जिन्हें सामान्यतः सरकारी रिकॉर्ड माना जाता है। ऐसे अभिलेखों का सार्वजनिक प्रसार प्रशासनिक मर्यादाओं और विभागीय नियमों के संदर्भ में चर्चा का विषय बन गया है।
मारपीट के विवाद के बाद दूसरा बड़ा मामला
पालपुर विद्यालय पिछले कुछ दिनों से लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। पहले छात्रों के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया, जिसके वीडियो और फोटो वायरल होने के बाद अभिभावकों और ग्रामीणों में नाराजगी देखने को मिली। अब उसी विद्यालय से सरकारी अभिलेखों के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने का मामला सामने आने से विवाद और गहरा गया है।
सरकारी अभिलेखों की गोपनीयता पर उठे सवाल
शिक्षा विभाग के जानकारों का कहना है कि विद्यालय की लॉगबुक, निरीक्षण पंजिका और शिक्षक उपस्थिति रजिस्टर जैसे अभिलेख विभागीय रिकॉर्ड होते हैं। इनका उपयोग निरीक्षण, प्रशासनिक कार्रवाई और विभागीय सत्यापन के लिए किया जाता है। ऐसे दस्तावेजों को सार्वजनिक मंचों पर साझा करना विभागीय नियमों के अनुरूप है या नहीं, यह जांच का विषय है।
बीएसए ने दिए जांच के संकेत
मामले में जब बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) चंदौली सचिन कुमार से बात की गई तो उन्होंने स्पष्ट कहा—
“सरकारी दस्तावेजों को वायरल करने या किसी निजी व्यक्ति को साझा करने का अधिकार किसी प्रधानाध्यापक को नहीं है। यदि ऐसा मामला सामने आया है तो उसकी जांच कराई जाएगी और तथ्य सही पाए जाने पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”
अब शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
प्रधानाध्यापक द्वारा सरकारी अभिलेख साझा किए जाने के आरोप के बाद अब सभी की निगाहें शिक्षा विभाग की जांच पर टिकी हैं। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।




