शहाबगंज: मनरेगा बना ‘लूट का अड्डा’! सुल्तानपुर में निवर्तमान प्रधान,जेई व रोजगार सेवक की तिकड़ी पर 101 फर्जी मजदूरों से सरकारी धन डकारने का आरोप
शहाबगंज विकासखंड के सुल्तानपुर ग्राम पंचायत में मनरेगा योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती दिखाई दे रही है।

मनरेगा बना ‘लूट का अड्डा’! सुल्तानपुर में निवर्तमान प्रधान-जेई-रोजगार सेवक की तिकड़ी पर 101 फर्जी मजदूरों से सरकारी धन डकारने का आरोप
दो कार्यों के लिए निकाले गए 11 मस्टररोल, रात 10 बजे अपडेट हो रही हाजिरी, मौके पर काम नहीं मिला
चंदौली। शहाबगंज विकासखंड के सुल्तानपुर ग्राम पंचायत में मनरेगा योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती दिखाई दे रही है। निवर्तमान ग्राम प्रधान, तकनीकी सहायक (जेई) और रोजगार सेवक की मिलीभगत से सरकारी धन के बंदरबांट का गंभीर आरोप सामने आया है। आरोप है कि बिना कार्य कराए ही सरकारी धन की निकासी की जा रही है और कागजों में फर्जी तरीके से मजदूरों की हाजिरी भरकर भुगतान की तैयारी की जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत में मात्र दो कार्यों के लिए 11 मस्टररोल जारी किए गए हैं, जिनमें कुल 101 मजदूरों की हाजिरी दर्ज की जा रही है। सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि मनरेगा पोर्टल पर रात करीब 10 बजे तक मजदूरों की उपस्थिति अपडेट की जा रही है, जिससे पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
आरोप है कि कागजों में बलिराम के खेत तक मिट्टी कार्य कराया जाना दर्शाया गया है, जबकि मौके पर ऐसा कोई कार्य दिखाई नहीं देता। ग्रामीणों का कहना है कि धरातल पर विकास कार्य शून्य है, लेकिन सरकारी अभिलेखों में कार्य पूर्ण गति से चल रहा है।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता का मामला हो सकता है। स्थानीय लोगों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस गंभीर मामले का संज्ञान लेकर जांच कराते हैं या फिर सरकारी धन की बंदरबांट का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।




