Chakia: इंदरपुरवा में मनरेगा पर ‘कागजी खेल’, बाहा खुदाई के नाम पर लाखों के गबन का आरोप, जिला पंचायत के जेई व ठेकेदार मिलकर कर रहें भ्रष्टाचार
स्थानीय विकासखंड के इंदरपुरवा गांव में मनरेगा के तहत कराए जा रहे बाहा खुदाई कार्य में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता के आरोप सामने आए हैं।

इंदरपुरवा में मनरेगा पर ‘कागजी खेल’, बाहा खुदाई के नाम पर लाखों के गबन का आरोप
एक ही कार्य पर सात मस्टररोल, 60 मजदूर सिर्फ रिकॉर्ड में; ग्रामीणों ने जिला पंचायत के ठेकेदार और जेई की भूमिका की निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
चकिया, चंदौली। स्थानीय विकासखंड के इंदरपुरवा गांव में मनरेगा के तहत कराए जा रहे बाहा खुदाई कार्य में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जमीन पर कार्य नगण्य या नहीं के बराबर हुआ है, जबकि सरकारी अभिलेखों में काम पूरा दिखाकर लाखों रुपये के भुगतान की प्रक्रिया अपनाई गई। मामले में जिला पंचायत के ठेकेदार और संबंधित जूनियर इंजीनियर (जेई) की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, बाहा खुदाई के एक ही कार्य के लिए सात मस्टररोल जारी किए गए हैं, जिनमें करीब 60 मजदूरों के नाम दर्ज हैं। आरोप है कि इनमें से कई मजदूरों ने मौके पर कोई काम ही नहीं किया, फिर भी उनकी उपस्थिति दर्ज कर भुगतान की कार्रवाई की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा जैसी श्रमिक हितैषी योजना को कागजों तक सीमित कर सरकारी धन के दुरुपयोग का माध्यम बना दिया गया है।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि मौके पर कार्य का वास्तविक स्वरूप सरकारी रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता। कागजों में बाहा खुदाई का कार्य तेजी से चलता दिखाया गया, जबकि स्थल पर वैसा कोई कार्य दिखाई नहीं देता। ऐसे में फर्जी मस्टररोल और कथित फर्जी हाजिरी के जरिए सरकारी धन के गबन की आशंका और गहरा गई है।
ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि तकनीकी जांच, मस्टररोल, जियो-टैग फोटो और भुगतान अभिलेखों का मिलान कराया जाए तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है। ग्रामीणों ने दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।




