मनरेगा घोटाले का खेल! कागजों में दौड़ रही 409 मजदूरों की ‘फैक्ट्री’, 8 कार्यों पर 44 मस्टररोल जारी
शहाबगंज विकासखंड के घोड़सारी गांव में मनरेगा योजना के तहत बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है।

घोड़सारी में मनरेगा घोटाले का खेल! कागजों में दौड़ रही 409 मजदूरों की ‘फैक्ट्री’, 8 कार्यों पर 44 मस्टररोल जारी
चंदौली। शहाबगंज विकासखंड के घोड़सारी गांव में मनरेगा योजना के तहत बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। आरोप है कि गांव में वास्तविकता से इतर केवल कागजों पर मजदूरों की भारी-भरकम फौज खड़ी कर सरकारी धन के बंदरबांट का खेल खेला जा रहा है।
उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार गांव में विभिन्न कार्यों के लिए 409 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गई है, जबकि स्थानीय लोगों का दावा है कि मौके पर इतनी संख्या में मजदूर कभी दिखाई नहीं देते। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि महज 8 कार्यों के लिए 44 मस्टररोल जारी किए गए हैं, जिससे पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि मनरेगा का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराना है, लेकिन घोड़सारी में यह योजना कुछ लोगों के लिए कमाई का जरिया बनती जा रही है। यदि अभिलेखों में दर्ज मजदूरों की संख्या और वास्तविक कार्यस्थल की स्थिति का निष्पक्ष सत्यापन कराया जाए तो बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का खुलासा हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी कार्यस्थल पर मजदूरों की उपस्थिति, कार्य की प्रगति और मस्टररोल का मिलान कराया जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर दर्ज मजदूरों और जारी मस्टररोल की निगरानी किस स्तर पर हो रही है, क्या संबंधित अधिकारियों ने कभी मौके पर पहुंचकर सत्यापन किया।
घोड़सारी का यह मामला मनरेगा की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है, ताकि सरकारी योजनाओं में हो रहे कथित भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके और वास्तविक मजदूरों को उनका हक मिल सके।




