चंदौली

चकिया: गोगहरा में मनरेगा बना लूट का जरिया! बिना मजदूरों के चल रहा काम, कागजों में खपाए गए 84 श्रमिक

सरकार मनरेगा को ग्रामीणों को रोजगार देने और गांवों के विकास का सशक्त माध्यम बताती है, लेकिन चकिया विकासखंड के गोगहरा गांव में यह योजना कथित तौर पर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती दिखाई दे रही है।

चकिया, चंदौली। सरकार मनरेगा को ग्रामीणों को रोजगार देने और गांवों के विकास का सशक्त माध्यम बताती है, लेकिन चकिया विकासखंड के गोगहरा गांव में यह योजना कथित तौर पर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती दिखाई दे रही है। यहां मनरेगा कार्यस्थल पर मजदूरों की मौजूदगी नगण्य है, जबकि सरकारी अभिलेखों में दर्जनों श्रमिकों की हाजिरी दर्ज कर भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

ग्रामीणों के अनुसार गांव में चल रहे एक मनरेगा कार्य के लिए कुल 9 मस्टररोल जारी किए गए हैं, जिनमें 84 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज है। हैरानी की बात यह है कि कार्यस्थल पर इतनी संख्या में मजदूर दिखाई नहीं पड़ते। आरोप है कि केवल कागजों में श्रमिकों की हाजिरी भरकर सरकारी धन के बंदरबांट की तैयारी की जा रही है।

सरकार ने मनरेगा में पारदर्शिता लाने के लिए एनएमएमएस (आंख आधारित हाजिरी) जैसी व्यवस्था लागू की है, ताकि फर्जीवाड़े पर रोक लग सके। इसके बावजूद गोगहरा में नियमों को धता बताते हुए कथित रूप से फर्जी उपस्थिति दर्ज किए जाने का मामला सामने आया है। इससे व्यवस्था की निगरानी और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता उजागर हो सकती है। लोगों ने जिला प्रशासन से जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कार्यस्थल पर मजदूर मौजूद नहीं हैं तो फिर सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज 84 श्रमिक कौन हैं और आखिर किसके संरक्षण में मनरेगा की धनराशि को कागजों पर ही खर्च दिखाया जा रहा है, इन सवालों का जवाब प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।

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