Chakia: भलुआ बिलौड़ी में महिला रोजगार सेवक पर भ्रष्टाचार का आरोप, 98 मजदूरों की हाजिरी का खेल, जांच की मांग
एक काम पर 10 मस्टररोल जारी करने का आरोप, धरातल पर काम नदारद होने का दावा

भलुआ बिलौड़ी में महिला रोजगार सेवक सीता पर उठे सवाल, 98 मजदूरों की हाजिरी का खेल!
एक काम पर 10 मस्टररोल जारी करने का आरोप, धरातल पर काम नदारद होने का दावा
बीडीओ से बार-बार शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं, जिम्मेदारों की चुप्पी पर ग्रामीणों में नाराजगी
चकिया, चंदौली। सरकारी पोर्टल पर मजदूरों की हाजिरी दर्ज, लेकिन जमीन पर काम का अता-पता नहीं! चकिया विकासखंड की भलुआ बिलौड़ी ग्राम पंचायत में वीबी-जी राम जी योजना के तहत कथित अनियमितताओं ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि 98 मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी दर्ज की जा रही है, जबकि मौके पर काम पूरी तरह ठप है। इतना ही नहीं, एक ही कार्य के लिए 10 मस्टररोल जारी किए जाने का आरोप भी लगाया गया है।
महिला रोजगार सेवक की भूमिका जांच के घेरे में
ग्रामीणों ने महिला रोजगार सेवक सीता पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि बिना मजदूरों के काम किए ही ऑनलाइन पोर्टल पर हाजिरी दर्ज की जा रही है। यदि यह दावा जांच में सही पाया जाता है तो यह योजना के क्रियान्वयन और सरकारी धन के उपयोग को लेकर गंभीर मामला बन सकता है। हालांकि, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अभिलेखों की जांच होना अभी बाकी है।
शिकायतें होती रहीं, कार्रवाई कहां अटकी
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस कथित गड़बड़ी की शिकायत कई बार खंड विकास अधिकारी से की, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कमीशनखोरी के आरोप भी लगाए हैं। इन आरोपों की पुष्टि के लिए स्वतंत्र साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं, ऐसे में निष्पक्ष जांच जरूरी है।
ऑनलाइन हाजिरी का होगा सत्यापन या फाइलों में ही सिमट जाएगा मामला
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि 98 मजदूरों की हाजिरी दर्ज है, तो उनकी वास्तविक उपस्थिति और किए गए काम का सत्यापन किसने किया, एक कार्य के लिए 10 मस्टररोल जारी होने के दावे की जांच क्यों नहीं कराई गई? क्या संबंधित अधिकारियों ने कार्यस्थल का भौतिक निरीक्षण किया और ऑनलाइन रिकॉर्ड का वास्तविक स्थिति से मिलान किया।
ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित मस्टररोल, हाजिरी रिकॉर्ड और कार्यस्थल की जांच कराई जाए। साथ ही, शिकायतों पर कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक की जाए और जांच में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो। अब निगाहें विकासखंड प्रशासन पर हैं कि वह इन गंभीर आरोपों की जांच कराकर स्थिति स्पष्ट करता है या ग्रामीणों के सवाल अनुत्तरित ही रह जाते हैं।




