चकिया: बिठवल कला गांव, शिलापट्ट पर लागत गायब, भ्रष्टाचार की बू तेज, मनरेगा से बने सीढ़ी और पक्के घाट निर्माण में क्षेत्र पंचायत सदस्य पर धांधली का आरोप, ग्रामीणों ने उठाए सवाल

शिलापट्ट पर लागत गायब, भ्रष्टाचार की बू तेज
मनरेगा से बने सीढ़ी और पक्के घाट निर्माण में धांधली का आरोप, ग्रामीणों ने उठाए सवाल
चकिया, चंदौली। विकास कार्यों में पारदर्शिता का दावा करने वाली सरकार की योजनाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। बिठवल कला ग्राम पंचायत के पकड़ी गांव में पंचायत भवन के पास मनरेगा योजना वर्ष 2024-25 के तहत प्रमुख निधि से क्षेत्र पंचायत सदस्य द्वारा नहर किनारे सीढ़ी व पक्के घाट का निर्माण कराया गया, लेकिन निर्माण कार्य शुरू होने से लेकर लोकार्पण तक पूरे मामले में पारदर्शिता गायब दिखाई दे रही है।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर धांधली की गई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि मौके पर लगाए गए लोकार्पण बोर्ड पर निर्माण कार्य की लागत तक अंकित नहीं की गई। जबकि शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी सरकारी निर्माण कार्य में लागत, कार्यदायी संस्था, वित्तीय वर्ष और संबंधित अधिकारियों का विवरण सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाए ताकि जनता को जानकारी मिल सके और जवाबदेही तय हो सके।
ग्रामीणों का कहना है कि जब बोर्ड पर लागत ही नहीं लिखी गई तो आखिर कितनी धनराशि खर्च हुई, इसका जवाब कौन देगा? लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में मानकों की भी अनदेखी की गई है और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि गांवों में विकास के नाम पर सरकारी धन खर्च तो दिखाया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत में पारदर्शिता और गुणवत्ता दोनों गायब नजर आती हैं। शिलापट्ट पर लागत छिपाना केवल एक तकनीकी गलती नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की आशंका को खुला निमंत्रण माना जा रहा है।
अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी मामले को गंभीरता से लेते हैं या फिर अन्य शिकायतों की तरह यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।




