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चंदौली

शहाबगंज: रसिया में मनरेगा बना लूट का रोजगार, 91 फर्जी मजदूरों से लाखों की बंदरबांट का आरोप, दो कार्यों पर 10 मस्टररोल, कार्रवाई पर मौन अधिकारी… आखिर किसके संरक्षण में चल रहा खेल

शहाबगंज विकासखंड अंतर्गत रसिया गांव में मनरेगा योजना अब रोजगार का नहीं बल्कि कथित भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े का बड़ा अड्डा बनती जा रही है। गांव में लगातार धांधली की खबरें सामने आने और कई बार मीडिया में मामला उजागर होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई के नाम पर पूरी तरह मौन साधे हुए हैं।

रसिया में मनरेगा बना ‘लूट का रोजगार’! 91 फर्जी मजदूरों से लाखों की बंदरबांट का आरोप

दो कार्यों पर 10 मस्टररोल, कार्रवाई पर मौन अधिकारी… आखिर किसके संरक्षण में चल रहा खेल?

चंदौली। शहाबगंज विकासखंड अंतर्गत रसिया गांव में मनरेगा योजना अब रोजगार का नहीं बल्कि कथित भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े का बड़ा अड्डा बनती जा रही है। गांव में लगातार धांधली की खबरें सामने आने और कई बार मीडिया में मामला उजागर होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई के नाम पर पूरी तरह मौन साधे हुए हैं। इससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि रसिया गांव में मनरेगा के तहत केवल कागजों में ही मजदूरों की फौज खड़ी कर दी गई है। यहां कुल 91 मजदूरों का नाम ऑनलाइन दर्ज कर भुगतान की प्रक्रिया चलाई जा रही है, जबकि हकीकत में मौके पर कार्य करने वाले मजदूर दिखाई ही नहीं देते। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जो लोग मनरेगा में कभी काम करने नहीं पहुंचे, उनकी तस्वीरें तक पोर्टल पर अपलोड कर दी गई हैं।

सूत्रों के अनुसार गांव में मात्र दो कार्यों के लिए 10 मस्टररोल जारी किया गया है। इससे साफ संकेत मिल रहा है कि फर्जी हाजिरी और भुगतान के जरिए सरकारी धन के बंदरबांट का खेल बड़े स्तर पर खेला जा रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी अनियमितता बिना अधिकारियों की जानकारी के कैसे संभव है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करा दी जाए तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। लेकिन लगातार शिकायतों और खबरों के बावजूद विभागीय अधिकारियों की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। लोग अब खुलकर कहने लगे हैं कि कहीं भ्रष्टाचार और जिम्मेदारों की मिलीभगत तो इस खेल की असली वजह नहीं है।

मनरेगा जैसी योजना, जिसका उद्देश्य गरीबों को रोजगार देना है, वही अब कथित रूप से फर्जी मस्टररोल और कागजी मजदूरों के सहारे भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।

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