शहाबगंज: किडिहरा में मनरेगा पर भ्रष्टाचार का साया, कागजों में दौड़ रहे 70 मजदूर, कमीशनखोरी से खामोश अफसर
शहाबगंज विकासखंड अंतर्गत किडिहरा गांव में मनरेगा योजना एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। गांव में विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर धांधली किए जाने का आरोप सामने आया है।

किडिहरा में मनरेगा पर भ्रष्टाचार का साया, कागजों में दौड़ रहे 70 मजदूर!
चंदौली। शहाबगंज विकासखंड अंतर्गत किडिहरा गांव में शुक्रवार 22 मई को मनरेगा योजना एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। गांव में विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर धांधली किए जाने का आरोप सामने आया है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां मजदूरों से ज्यादा कागजों में काम चल रहा है और सरकारी धन का खुला बंदरबांट किया जा रहा है।
आरोप है कि गांव में केवल दो कार्यों के लिए कुल 8 मस्टररोल जारी किए गए हैं, जबकि रिकॉर्ड में 70 मजदूरों को कार्यरत दिखाया गया है। हकीकत यह है कि कार्यस्थल पर इतने मजदूर कभी दिखाई ही नहीं देते। कई ऐसे नाम भी दर्ज बताए जा रहे हैं जो या तो काम पर गए ही नहीं या फिर उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं है। इससे साफ संकेत मिल रहा है कि मनरेगा में फर्जी उपस्थिति और भुगतान का खेल जमकर खेला जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि मनरेगा योजना अब मजदूरों के रोजगार का माध्यम कम और कमीशनखोरी का अड्डा ज्यादा बनती जा रही है। गांव में चर्चा है कि कमीशन का नेटवर्क इतना मजबूत हो चुका है कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने से बचते नजर आ रहे हैं। यही कारण है कि भ्रष्टाचार करने वालों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब दो कार्यों पर 70 मजदूरों की मौजूदगी कागजों में दिखाई जा रही है, तो धरातल पर उसका सत्यापन क्यों नहीं कराया जा रहा? यदि निष्पक्ष जांच हो जाए तो फर्जी मस्टररोल, भुगतान और कमीशनखोरी की परतें खुल सकती हैं।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस खेल पर रोक नहीं लगी तो मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती रहेगी।




