शहाबगंज: बेलावर गांव में मनरेगा पर भ्रष्टाचार का बुलडोजर, 172 मजदूर सिर्फ कागजों में जिंदा, ग्राम प्रधान पर गंभीर आरोप, दो कामों के लिए 18 मस्टररोल
शहाबगंज विकासखंड अंतर्गत बेलावर गांव में मनरेगा योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। गांव में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन की खुली लूट किए जाने का आरोप लग रहा है।

बेलावर में मनरेगा पर डाका! 172 फर्जी मजदूरों के नाम पर खेल, बिना काम निकाला जा रहा पैसा
चंदौली। शहाबगंज विकासखंड अंतर्गत बेलावर गांव में मनरेगा योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। गांव में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन की खुली लूट किए जाने का आरोप लग रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां केवल कागजों में मजदूरों की फौज खड़ी कर लाखों रुपये की बंदरबांट की जा रही है।
आरोप है कि बेलावर गांव में मात्र दो कार्यों के लिए 18 मस्टररोल निकाले गए हैं, जिनमें कुल 172 मजदूरों को कार्यरत दिखाया गया है। जबकि धरातल पर न तो इतने मजदूर दिखाई दे रहे हैं और न ही उतना कार्य हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान की मिलीभगत से फर्जी हाजिरी भरकर सरकारी धन का बंदरबांट किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि कई ऐसे लोगों के नाम मस्टररोल में दर्ज हैं, जो कभी कार्यस्थल पर पहुंचे ही नहीं। इसके बावजूद उनके नाम पर भुगतान निकाल लिया गया। इससे साफ जाहिर होता है कि मनरेगा योजना को रोजगार का साधन नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया गया है।
गांव में चर्चा है कि बिना कार्य कराए ही भुगतान निकालने का खेल लंबे समय से चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी ग्राम प्रधान व संबंधित कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है या फिर भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने का प्रयास किया जाएगा।




