शहाबगंज: सीमा पर शराब का सिंडिकेट, छित्तमपुर कम्पोजिट शराब दुकान से बिहार तक पहुंच रही खेप, आबकारी विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल
उत्तर प्रदेश-बिहार सीमा पर स्थित छित्तमपुर देशी कम्पोजिट शराब की दुकान एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है।

सीमा पर शराब का सिंडिकेट, छित्तमपुर कम्पोजिट शराब दुकान से बिहार तक पहुंच रही खेप, आबकारी विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल
चकिया, चंदौली। उत्तर प्रदेश-बिहार सीमा पर स्थित छित्तमपुर देशी कम्पोजिट शराब की दुकान एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। स्थानीय सूत्रों और क्षेत्रीय चर्चाओं के अनुसार इस दुकान से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में शराब बिहार भेजी जा रही है, जबकि बिहार में शराबबंदी कानून लागू है। आरोप है कि दुकान से निर्धारित स्टॉक और बिक्री के आंकड़ों से कहीं अधिक शराब का कारोबार किया जा रहा है, जिससे पूरे मामले में बड़े खेल की आशंका गहराती जा रही है।
सूत्रों का दावा है कि प्रतिदिन 50 से 70 पेटी तक शराब बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में खपाई जा रही है। यदि यह आरोप सही हैं, तो यह केवल अवैध तस्करी का मामला नहीं बल्कि राजस्व, कानून व्यवस्था और आबकारी नियमों की खुली अवहेलना का उदाहरण भी है। सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में शराब सीमा पार कैसे पहुंच रही है और जिम्मेदार विभागों को इसकी भनक तक क्यों नहीं लग रही।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सीमा क्षेत्र में वर्षों से सक्रिय शराब तस्करों का नेटवर्क प्रशासनिक निगरानी को चुनौती देता रहा है। छित्तमपुर स्थित दुकान का नाम बार-बार चर्चाओं में आने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई का अभाव कई सवाल खड़े करता है। आखिर ऐसी कौन-सी मजबूरी है कि शिकायतों और चर्चाओं के बावजूद आबकारी विभाग की ओर से कोई कठोर कदम उठता दिखाई नहीं देता।
सबसे बड़ा प्रश्न स्टॉक और बिक्री के आंकड़ों को लेकर है। यदि दुकान से वास्तविक बिक्री और सरकारी रिकॉर्ड का मिलान कराया जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। आरोप है कि रिकॉर्ड में कुछ और दिखाया जाता है, जबकि जमीनी स्तर पर शराब की निकासी कहीं अधिक होती है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि कहीं सरकारी अभिलेखों और वास्तविक बिक्री के बीच बड़ा अंतर तो नहीं है।
सीमा क्षेत्र होने के कारण छित्तमपुर का यह इलाका पहले से ही संवेदनशील माना जाता है। बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों से शराब तस्करी की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसे में यदि प्रतिदिन दर्जनों पेटी शराब बिहार भेजे जाने के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल स्थानीय स्तर का मामला नहीं बल्कि अंतरराज्यीय तस्करी का गंभीर प्रकरण होगा।
जनता के बीच चर्चा है कि जब छोटी-छोटी मात्रा में शराब ले जाने वालों पर कार्रवाई हो सकती है, तो फिर बड़े स्तर पर कथित कारोबार करने वालों पर विभागीय शिकंजा क्यों नहीं कस रहा, आबकारी विभाग की निष्क्रियता और खामोशी अब लोगों के बीच संदेह को और गहरा रही है।
अब निगाहें जिला प्रशासन और आबकारी विभाग पर टिकी हैं। यदि मामले की निष्पक्ष जांच कर स्टॉक रजिस्टर, बिक्री विवरण, सीसीटीवी फुटेज और परिवहन गतिविधियों की पड़ताल कराई जाए, तो सच्चाई सामने आ सकती है। सवाल केवल एक दुकान का नहीं, बल्कि कानून के राज और सरकारी तंत्र की जवाबदेही का है। जनता जानना चाहती है कि सीमा पर चल रहे इस कथित खेल का सच आखिर कब सामने आएगा।




