Welcome to Hindvani Times   Click to listen highlighted text! Welcome to Hindvani Times
चंदौली

अतायस्तगंज में सरकारी गडही पर कब्जे का खेल! राजस्व अभिलेखों की धज्जियां उड़ाकर खड़ा हो रहा निर्माण

13.5 बिस्वा सार्वजनिक जल स्रोत पर अवैध निर्माण का आरोप, ग्रामीणों ने एसडीएम से अतिक्रमण हटाने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की

अतायस्तगंज में सरकारी गडही पर कब्जे का खेल! राजस्व अभिलेखों की धज्जियां उड़ाकर खड़ा हो रहा निर्माण

13.5 बिस्वा सार्वजनिक जल स्रोत पर अवैध निर्माण का आरोप, ग्रामीणों ने एसडीएम से अतिक्रमण हटाने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की

चंदौली। चकिया तहसील के अतायस्तगंज गांव में राजस्व अभिलेखों में गडही के रूप में दर्ज सार्वजनिक भूमि पर कथित अवैध अतिक्रमण का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी चकिया को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया है कि आराजी संख्या 200, रकबा लगभग 13.5 बिस्वा पर नियमों को ताक पर रखकर निर्माण कराया जा रहा है, जबकि यह भूमि जल संरक्षण के लिए सुरक्षित सार्वजनिक संपत्ति है।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार एक ओर तालाब, पोखर और गडही को अतिक्रमण मुक्त कराने का अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर अतायस्तगंज में सरकारी गडही पर कब्जा कर उसका अस्तित्व ही मिटाने की कोशिश की जा रही है। आरोप है कि स्थानीय स्तर पर कई बार जानकारी देने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की, जिससे अतिक्रमण करने वालों के हौसले बुलंद हैं।

शिकायत में कहा गया है कि यदि समय रहते निर्माण नहीं रोका गया तो वर्षा जल संचयन, जल निकासी और भूजल संरक्षण पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। ग्रामीणों ने यह भी उल्लेख किया है कि सार्वजनिक जल स्रोतों को उनके मूल स्वरूप में बहाल करने के संबंध में न्यायालयों के स्पष्ट निर्देश और शासन के आदेश पहले से लागू हैं, इसके बावजूद कार्रवाई न होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी से मांग की है कि मामले की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, सरकारी गडही से तत्काल अतिक्रमण हटाया जाए, उसे मूल स्वरूप में बहाल कराया जाए तथा यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत अथवा लापरवाही सामने आए तो उसके विरुद्ध भी कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए।

अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह सार्वजनिक जल स्रोत की रक्षा के लिए त्वरित कदम उठाता है या फिर सरकारी भूमि पर कब्जे के आरोपों को यूं ही नजरअंदाज किया जाता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!