चकिया: छुछाड़ पंचायत भवन पर सालों से ताला, सरकारी सुविधाएं धूल फांक रहीं, कागजों में पंचायत भवन, जमीन पर बंद कमरा
जाति-आय-निवास प्रमाणपत्र के लिए ग्रामीण लगा रहे ब्लॉक-तहसील के चक्कर
छुछाड़ पंचायत भवन पर सालों से ताला, सरकारी सुविधाएं धूल फांक रहीं
कागजों में पंचायत भवन, जमीन पर बंद कमरा
जाति-आय-निवास प्रमाणपत्र के लिए ग्रामीण लगा रहे ब्लॉक-तहसील के चक्कर
चकिया, चंदौली। गांव की सरकार को गांव तक पहुंचाने के लिए बनाए गए पंचायत भवन की तस्वीर अगर देखनी हो तो छुछाड़ ग्राम पंचायत के राजस्व गांव रतिगढ़ पहुंचिए। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां पंचायत भवन वर्षों से बंद पड़ा है और उसके मुख्य दरवाजे पर लगातार ताला लटका हुआ है। जिस भवन से ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर सरकारी सुविधाएं मिलनी चाहिए थीं, वहां शासन से उपलब्ध कराए गए कंप्यूटर, अलमारी, बैटरी, कैमरा, प्रिंटर समेत अन्य उपकरण कमरे के अंदर धूल और जंग की मार झेल रहे हैं।
भवन बना, संसाधन आए, लेकिन खुला नहीं दरवाजा
ग्रामीणों के मुताबिक पंचायत भवन का उद्देश्य गांव में ही लोगों को जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराना और पंचायत के कामकाज को सुचारु बनाना है। प्रशासन की ओर से पंचायत सहायक तथा प्रशासक/ग्राम प्रधान को पंचायत भवन में नियमित रूप से बैठने और ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के साथ गांव के विकास की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। आरोप है कि रतिगढ़ में इन निर्देशों का धरातल पर पालन नहीं हो रहा है।
प्रमाणपत्र के लिए ब्लॉक-तहसील की दौड़
ग्रामीण संदीप सिंह, दूधनाथ कोटेदार, मनोज कुमार, मोहन गोंड, ओम प्रकाश, कमलेश, प्रदीप, प्रिंस, सर्वेश, दीपक और सतीश का आरोप है कि पंचायत भवन नियमित रूप से नहीं खुलता। जाति, आय और निवास प्रमाणपत्र सहित अन्य जरूरी कार्यों के लिए उन्हें ब्लॉक और तहसील का चक्कर लगाना पड़ता है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि पंचायत सहायक कंप्यूटर सिस्टम पर बैठकर ग्रामीणों के कार्यों का निस्तारण नहीं करता।
शिकायत के बाद भी नहीं खुला ताला
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवन की बदहाली और नियमित रूप से नहीं खुलने की शिकायत संबंधित उच्च अधिकारियों से की गई, लेकिन स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ। सवाल यह है कि जब पंचायत भवन के लिए भवन से लेकर कंप्यूटर और प्रिंटर तक सरकारी संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं तो उनका इस्तेमाल कौन और कब कर रहा है।
ग्रामीणों ने मामले की जांच कर पंचायत भवन को नियमित रूप से खुलवाने, सरकारी उपकरणों के उपयोग और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कराने तथा जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।




