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चंदौली

मासूमों पर ‘गुरुजी’ का कहर! पालपुर प्राथमिक विद्यालय में पिटाई के आरोप से बवाल, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।

मासूमों पर ‘गुरुजी’ का कहर! पालपुर प्राथमिक विद्यालय में पिटाई के आरोप से बवाल, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

छात्र-छात्राओं का आरोप—दीवार से सिर टकराया, बाल खींचकर पीटा; स्कूल पहुंचकर ग्रामीणों ने किया हंगामा, जांच व कार्रवाई की मांग, वीडियो वायरल

शहाबगंज, चंदौली। शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। विकासखंड शहाबगंज के प्राथमिक विद्यालय पालपुर में प्रधानाचार्य सुरेश कुमार सोनकर पर छात्र-छात्राओं के साथ मारपीट और अमानवीय व्यवहार करने के गंभीर आरोप लगने के बाद बुधवार को विद्यालय परिसर में जमकर हंगामा हुआ। आक्रोशित ग्रामीणों और अभिभावकों ने विद्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया तथा शिक्षा विभाग से तत्काल निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर कड़ी विभागीय कार्रवाई की मांग उठाई।

छात्र-छात्राओं का आरोप है कि प्रधानाचार्य ने अनुशासन के नाम पर उनके साथ मारपीट की, कई बच्चों का सिर दीवार से टकराया और बाल खींचकर प्रताड़ित किया। बच्चों के आरोप सामने आने के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और बड़ी संख्या में लोग विद्यालय पहुंच गए। मौके पर काफी देर तक तनाव का माहौल बना रहा।

ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में शैक्षणिक व्यवस्था भी लगातार प्रभावित हो रही है और प्रधानाचार्य के व्यवहार को लेकर पहले भी शिकायतें की जा चुकी हैं। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से हालात बिगड़ते गए। अभिभावकों ने कहा कि जिस विद्यालय में बच्चे शिक्षा लेने जाते हैं, वहां यदि भय का माहौल होगा तो उनका भविष्य कैसे सुरक्षित रहेगा।

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ग्रामीणों ने मांग की है कि वायरल वीडियो, छात्र-छात्राओं, अभिभावकों तथा विद्यालय स्टाफ के बयान दर्ज कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित प्रधानाचार्य के विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई की जाए।

अब सभी की निगाहें बेसिक शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन पर टिकी हैं। सवाल यह है कि बच्चों पर अत्याचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच कब होगी और यदि आरोप सही साबित होते हैं तो जिम्मेदार के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा के मंदिर में अनुशासन के नाम पर हिंसा के आरोपों ने पूरे शिक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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