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चंदौली

शहाबगंज: हडौरा में मनरेगा का खेल: दो काम, 14 मस्टररोल, 131 मजदूर कागजों में हाजिर

शहाबगंज विकासखंड के हडौरा गांव में मनरेगा योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। गांव में महज दो कार्यों के नाम पर 14 मस्टररोल जारी कर दिए गए और 131 मजदूरों की हाजिरी कागजों में भर दी गई।

हडौरा में मनरेगा का खेल: दो काम, 14 मस्टररोल, 131 मजदूर कागजों में हाजिर

चंदौली। शहाबगंज विकासखंड के हडौरा गांव में मनरेगा योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। गांव में महज दो कार्यों के नाम पर 14 मस्टररोल जारी कर दिए गए और 131 मजदूरों की हाजिरी कागजों में भर दी गई। ग्रामीणों का आरोप है कि मौके पर न तो उतने मजदूर दिखे और न ही कार्यस्थल पर वैसा काम नजर आया, जैसा सरकारी अभिलेखों में दर्शाया गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा में रोजगार देने की योजना अब फर्जी हाजिरी और कागजी मजदूरों का जरिया बनती जा रही है। गांव में चल रहे कार्यों की वास्तविकता और सरकारी दस्तावेजों के आंकड़ों में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। इससे योजना की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब दो कार्य ही स्वीकृत थे, तो 14 मस्टररोल किस आधार पर जारी किए गए। 131 मजदूरों के नाम किस प्रक्रिया से दर्ज हुए और भुगतान की तैयारी किसके इशारे पर की गई। यदि यह आरोप सही हैं तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी धन के बंदरबांट का संगठित खेल माना जाएगा।

ग्रामीणों ने कई बार शिकायत कर जांच की मांग की, लेकिन अब तक जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि शिकायतों को दबाकर दोषियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।

मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य गरीबों को रोजगार देना है, लेकिन हडौरा में यह योजना कागजी मजदूरों की फैक्ट्री बनती दिख रही है। अब देखना यह है कि प्रशासन मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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