शहाबगंज : कागजों पर खुदी नाली, सरकारी धन की निकासी! सैदूपुर में छह मस्टररोल में 55 मजदूर दर्ज, धरातल पर हकीकत तलाश रहा गांव, जिम्मेदारी किसकी?
कागजों में खुद रही नाली, धरातल पर नदारद मजदूर सैदूपुर में वीबी-जी रामजी योजना के काम पर उठे सवाल

कागजों में खुद रही नाली, धरातल पर नदारद मजदूर
सैदूपुर में वीबी-जी रामजी योजना के काम पर उठे सवाल, एक कार्य पर छह मस्टररोल में 55 मजदूर दर्ज
चकिया, चंदौली। शहाबगंज विकासखंड के सैदूपुर गांव में वीबी-जी रामजी योजना के तहत कराए जा रहे कार्यों की हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस नाली खोदाई कार्य के नाम पर मजदूरों की उपस्थिति दर्ज कराई जा रही है, उसका अधिकांश काम धरातल पर नजर नहीं आ रहा है। बरसात के बीच नाली खोदाई का कार्य दिखाए जाने से योजना के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
बताया जा रहा है कि एक ही कार्य के लिए छह मस्टररोल जारी किए गए हैं, जिनमें कुल 55 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज है। आरोप है कि कागजों में मजदूर कार्य कर रहे हैं, लेकिन मौके पर वास्तविक स्थिति इससे अलग है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब कार्यस्थल पर मजदूर और काम की स्थिति स्पष्ट नहीं है तो मस्टररोल में दर्ज उपस्थिति के आधार पर भुगतान और धन निकासी किस आधार पर की जा रही है।
निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि योजना के कार्यों की स्थलीय जांच और मस्टररोल का सत्यापन जिम्मेदार अधिकारियों की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद यदि कागजों में मजदूरों की संख्या बढ़ाकर दर्ज की जा रही है और भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है तो यह प्रशासनिक निगरानी पर बड़ा सवाल है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की मौके पर जांच कर वास्तविक मजदूरों की उपस्थिति, मस्टररोल और भुगतान का मिलान कराने की मांग की है।
जिम्मेदारों की चुप्पी बनी सवाल
वीबी-जी रामजी योजना में पारदर्शिता और जमीनी सत्यापन के दावों के बीच सैदूपुर का मामला जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर रहा है। यदि शिकायतों और मौके की वास्तविकता में अंतर है तो इसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई जरूरी है। ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर निरीक्षण और सत्यापन की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों की नजर इन कथित अनियमितताओं पर कब पड़ेगी।




