बच्चों की कक्षा, गुरुजी की नींद! पालपुर विद्यालय का कथित फोटो बना चर्चा का विषय, कार्रवाई की मांग

‘शिक्षा का मंदिर’ या आरामगाह? स्कूल समय में प्रधानाचार्य के सोने का कथित फोटो वायरल, पढ़ाई पर उठे बड़े सवाल
पालपुर प्राथमिक विद्यालय फिर विवादों में; वायरल फोटो-वीडियो के बाद अभिभावकों में नाराजगी, जांच की मांग तेज
चंदौली। सरकारी विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। विकासखंड शहाबगंज के प्राथमिक विद्यालय पालपुर के प्रधानाचार्य सुरेश कुमार सोनकर का कथित रूप से विद्यालय समय में सोते हुए फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। यह वही विद्यालय है, जहां हाल ही में बच्चों के साथ कथित मारपीट के आरोपों को लेकर भी विवाद सामने आया था। अब नया वीडियो सामने आने के बाद अभिभावकों और ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जिस समय बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने और कक्षाओं की निगरानी करने की जिम्मेदारी निभाई जानी चाहिए, उस समय प्रधानाचार्य आराम फरमाते नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि यदि विद्यालय का मुखिया ही अपनी जिम्मेदारियों के प्रति गंभीर नहीं होगा तो बच्चों की शिक्षा का स्तर कैसे सुधरेगा।
ग्रामीणों और अभिभावकों ने बेसिक शिक्षा अधिकारी से मांग की है कि वायरल सामग्री की तकनीकी जांच कराई जाए, विद्यालय की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन सरकारी विद्यालयों में बच्चों का भविष्य गढ़ा जाना है, वहां यदि कार्य समय में लापरवाही के आरोप लगते हैं तो जवाबदेही कौन तय करेगा, क्या शिक्षा विभाग इस मामले में त्वरित और निष्पक्ष जांच कर उदाहरण प्रस्तुत करेगा, या मामला जांच की फाइलों में ही सीमित रह जाएगा।
हालांकि वायरल फोटो और वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि, इन फोटो और वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए इनके आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।




