Chakia: जिला पंचायत के काम में ‘कागजी मजदूरों’ का खेल! इंदरपुरवा में 7 मस्टररोल के सहारे सरकारी धन की बंदरबांट का आरोप
विकासखंड क्षेत्र के इंदरपुरवा गांव में जिला पंचायत निधि से कराए जा रहे कार्यों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि यहां विकास कार्यों की आड़ में सरकारी धन के दुरुपयोग का खेल चल रहा है।

जिला पंचायत के काम में ‘कागजी मजदूरों’ का खेल! इंदरपुरवा में 7 मस्टररोल के सहारे सरकारी धन की बंदरबांट का आरोप
चकिया, चंदौली। विकासखंड क्षेत्र के इंदरपुरवा गांव में जिला पंचायत निधि से कराए जा रहे कार्यों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि यहां विकास कार्यों की आड़ में सरकारी धन के दुरुपयोग का खेल चल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस कार्यस्थल पर जमीन पर काम नाममात्र का दिखाई दे रहा है, वहीं सरकारी अभिलेखों में दर्जनों मजदूरों की उपस्थिति दर्ज कर धन निकासी की तैयारी की जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार संबंधित कार्य के लिए एक नहीं बल्कि सात मस्टररोल जारी किए गए हैं, जबकि मौके पर कार्य की प्रगति और मजदूरों की संख्या कागजों से मेल नहीं खाती। आरोप है कि अभिलेखों में करीब 60 मजदूरों को कार्यरत दिखाया गया है, लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब कार्यस्थल पर मजदूर दिखाई नहीं दे रहे, तो फिर मजदूरी भुगतान किस आधार पर किया जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जिला पंचायत से जुड़े ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी धन को ठिकाने लगाने का प्रयास किया जा रहा है। यदि आरोप सही हैं तो यह केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि गरीब मजदूरों के हक पर सीधा डाका है। शासन जहां पारदर्शिता और जवाबदेही की बात करता है, वहीं इंदरपुरवा में कथित रूप से कागजी मजदूरों के सहारे सरकारी खजाने को चूना लगाने का खेल चल रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक ही कार्य के लिए सात-सात मस्टररोल जारी करने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या संबंधित विभाग ने कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन किया? क्या मजदूरों की उपस्थिति और कार्य की प्रगति का कोई स्वतंत्र निरीक्षण हुआ? इन सवालों के जवाब जिम्मेदार अधिकारियों को देने होंगे।
ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो यह मामला जिले में विकास कार्यों की पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर सकता है।
सरकारी योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार और क्षेत्र को विकास देना है, न कि कागजों पर मजदूर खड़े कर सरकारी धन की बंदरबांट करना। इंदरपुरवा के आरोपों की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित ठेकेदार, तकनीकी कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि जनता का विश्वास सरकारी योजनाओं पर बना रहे।




