चंदौली

Chakia: सरकारी दावों पर सवाल: गंभीर घायल महिला को समय पर नहीं मिली एंबुलेंस, युवकों ने निभाई मानवता की मिसाल

चकिया कोतवाली क्षेत्र के डोडापुर स्थित चकिया–अहरौरा मार्ग पर शनिवार शाम करीब 4 बजे हुए सड़क हादसे ने एक बार फिर आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और उनकी त्वरित प्रतिक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए।

एंबुलेंस के इंतजार में जूझती रही घायल महिला, समाजसेवियों की तत्परता से बची जान

चकिया, चंदौली। चकिया कोतवाली क्षेत्र के डोडापुर स्थित चकिया–अहरौरा मार्ग पर शनिवार शाम करीब 4 बजे हुए सड़क हादसे ने एक बार फिर आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और उनकी त्वरित प्रतिक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए। बाइक और साइकिल की आमने-सामने हुई टक्कर में एक बुजुर्ग महिला गंभीर रूप से घायल हो गई, लेकिन सूचना देने के बावजूद करीब एक घंटे तक एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंच सकी। ऐसे में स्थानीय समाजसेवियों की संवेदनशीलता और त्वरित पहल ने घायल महिला को समय पर अस्पताल पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

जानकारी के अनुसार, रार्वट्सगंज थाना क्षेत्र के गौरही गांव निवासी मुनव्वर चौहान अपनी माता दूजा देवी को लेकर घर लौट रहे थे। इसी दौरान डोडापुर के पास उनकी बाइक व साइकिल सवार सर्वेश पांडे निवासी डोडापुर से आमने-सामने टक्कर हो गई। हादसे में दूजा देवी के सिर में गंभीर चोट आई, जबकि सर्वेश पांडे भी कमर में चोटिल हो गए।

घटना के तुरंत बाद पास स्थित डीसी रेस्टोरेंट के मैनेजर श्याम यादव और डोडापुर निवासी समाजसेवी विजय पांडे उर्फ महादेव मौके पर पहुंचे। दोनों ने बिना देर किए 108 एंबुलेंस सेवा को सूचना दी, लेकिन काफी इंतजार के बावजूद एंबुलेंस नहीं पहुंची। घायल महिला की हालत बिगड़ती देख उन्होंने मानवीय पहल करते हुए निजी टोटो (इलेक्ट्रिक वाहन) की व्यवस्था की और उन्हें संयुक्त जिला चिकित्सालय, चकिया पहुंचाया।

अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने दूजा देवी की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए ट्रॉमा सेंटर, वाराणसी रेफर कर दिया।

घटना के दौरान एक और मार्मिक पहलू सामने आया। घायल महिला के पुत्र मुनव्वर चौहान के मोबाइल में बैलेंस न होने के कारण वह अपने परिजनों को दुर्घटना की सूचना तक नहीं दे पा रहे थे। इस स्थिति को देखते हुए श्याम यादव ने स्वयं उनके मोबाइल का रिचार्ज कराया, जिससे परिजनों से तत्काल संपर्क स्थापित हो सका और आवश्यक सहायता जुटाई जा सकी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सरकारें आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं और सुदृढ़ एंबुलेंस नेटवर्क का दावा करती हैं, तब गंभीर रूप से घायल मरीज को एक घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ना चिंता का विषय है। लोगों ने मांग की कि आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी घायल की जान केवल विलंबित सहायता के कारण जोखिम में न पड़े।

बताया गया कि मुनव्वर चौहान अपनी माता के साथ चंदौली स्थित एक रिश्तेदारी में आयोजित शादी समारोह से लौट रहे थे, तभी डोडापुर के समीप यह हादसा हो गया। दुर्घटना के बाद स्थानीय युवकों द्वारा दिखाई गई मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना की क्षेत्र में व्यापक सराहना हो रही है।

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