बेलावर में ‘कुलावा संग्राम’ : सिंचाई बनाम मछली पालन की लड़ाई में बंटे किसान, विधायक को करना पड़ा हस्तक्षेप
बेलावर गांव में बंधी निर्माण के दौरान कुलावा की ऊंचाई को लेकर किसानों के बीच ऐसा विवाद खड़ा हो गया है कि पूरा इलाका दो खेमों में बंट गया है।

बेलावर में ‘कुलावा संग्राम’ : सिंचाई बनाम मछली पालन की लड़ाई में बंटे किसान, विधायक को करना पड़ा हस्तक्षेप
चकिया, चंदौली। बेलावर गांव में बंधी निर्माण के दौरान कुलावा की ऊंचाई को लेकर किसानों के बीच ऐसा विवाद खड़ा हो गया है कि पूरा इलाका दो खेमों में बंट गया है। एक पक्ष जहां पुराने तकनीकी मानक के अनुसार कुलावा निर्माण की मांग कर रहा है, वहीं दूसरा पक्ष जलस्तर बढ़ाने के नाम पर इसे ऊंचा कराने पर अड़ा हुआ है। विवाद इतना बढ़ा कि मौके पर क्षेत्रीय विधायक को पहुंचकर स्थिति संभालनी पड़ी।
बंधी डिवीजन की ओर से बेलावर गांव में निर्माण कार्य तेजी से कराया जा रहा है, लेकिन कुलावा की ऊंचाई ने पूरे मामले को राजनीतिक और सामाजिक रंग दे दिया है। रामशाला और उसरी गांव के किसानों का साफ कहना है कि विभाग पहले से मौजूद तकनीकी ढांचे और पुरानी ऊंचाई के अनुसार ही निर्माण करा रहा था, लेकिन अब कुछ लोग अपने निजी हितों के लिए डिजाइन बदलवाने का दबाव बना रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि कुलावा को ऊंचा कराने की मांग सिंचाई हित में नहीं, बल्कि मछली पालन और जलभराव बनाए रखने की मंशा से की जा रही है। किसानों का कहना है कि यदि कुलावा की ऊंचाई बढ़ाई गई तो निचले हिस्सों में सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होगी और खेतों तक पानी पहुंचने में दिक्कतें आएंगी।
दूसरी ओर बेलावर, उसरा और धन्नीपुर के किसानों का तर्क है कि वर्तमान समय में जल संकट लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में यदि कुलावा कुछ ऊंचा बनाया जाता है तो जलस्तर बना रहेगा, किसानों को सिंचाई में सहूलियत मिलेगी और गर्मी के दिनों में पशुओं के लिए भी पानी उपलब्ध रहेगा।
गांव में बढ़ते तनाव और किसानों की नाराजगी की सूचना मिलते ही विधायक कैलाश आचार्य मौके पर पहुंचे। उन्होंने दोनों पक्षों की बातें सुनीं और निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। उनके साथ उमाशंकर सिंह, ओम प्रकाश सिंह और राजेश सिंह भी मौजूद रहे। विधायक ने अधिकारियों को निष्पक्ष तरीके से तकनीकी जांच कर किसानों के हित में निर्णय लेने का निर्देश देने की बात कही।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर विभागीय निर्माण कार्य के दौरान ऐसी स्थिति क्यों बनी, जहां किसान आमने-सामने आ गए, क्या निर्माण कार्य शुरू करने से पहले सभी प्रभावित गांवों की सहमति और तकनीकी पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की गई थी।
फिलहाल बेलावर में कुलावा अब सिर्फ निर्माण का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह किसानों के अधिकार, जल प्रबंधन और स्थानीय हितों की लड़ाई का केंद्र बन चुका है। प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह किसी एक पक्ष के दबाव में आए बिना ऐसा समाधान निकाले, जिससे सिंचाई व्यवस्था भी सुरक्षित रहे और गांवों में आपसी विवाद भी न बढ़े।




